पेरिस ओलंपिक में मेडल जीतने वाले एथलीट को मिल रहा है 'एफिल टावर' का लोहा ? सामने आया सच

Global Bharat 29 Jul 2024 06:09: PM 2 Mins
पेरिस ओलंपिक में मेडल जीतने वाले एथलीट को मिल रहा है 'एफिल टावर' का लोहा ? सामने आया सच

भारत की स्टार शूटर मनु भाकर, पेरिस ओलंपिक 2024 में मेडल टैली का उद्घाटन कर चुकी है. रविवार 28 जुलाई 2024 को 10 मीटर एयर पिस्टल निशानेबाजी इवेंट में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. इस इवेंट में मेडल जीतने वाली मनु भारत के लिए पहली एथलीट बन गयी है. मनु भाकर का ब्रॉन्ज़ मेडल के साथ तस्वीर जब से सामने आयी है तब से लोगों के मन में एक सवाल है. दरअसल मनु भाकर को जो मेडल दिया गया है उस मेडल के बीच में लोहे का टुकड़ा नजर आ रहा है, और लोग ये जानना चाहते हैं कि ओलंपिक मेडल में लोहे का टुकड़ा क्या कर रहा है. ओलंपिक में मेडल लाना किसी भी एथलिट का सबसे बड़ा सपना होता है, कई एथलिट सिर्फ इस लिए महानतम दर्जा नहीं पा पाते क्योंकि उनके नाम ओलंपिक में एक भी मेडल नहीं है. ओलंपिक खेलों में 3 मेडल दिए जाते हैं. हर खेल में नंबर 1 पर रहने पर गोल्ड, रनर्स अप रहने पर सिल्वर और नंबर 3 पर फिनिश करने वाले एथलीट को ब्रॉन्ज़ मेडल से सम्मानित किया जाता है. 

जिस सवाल का जवाब हर कोई जानना चाहता है चलिए उस सवाल पर आ जाते हैं. तो सवाल है, पेरिस ओलंपिक्स में मेडल के बीच में वो लोहे का टुकड़ा क्या कर रहा है, और उस लोहे के टुकड़े को लगाने के पीछे का कारण क्या है. दरअसल इस बार ओलंपिक खेलों का आयोजन पेरिस में हो रहा है. वहीं इस बार मेडल जीतने वाले एथलीट अपने घर Eiffel Tower का लोहा साथ में ले जाएंगे. इस बार हर एक मेडल पर एफिल टावर के लोहे के एक टुकड़े का इस्तेमाल किया गया है, यानी मेडल जीतने पर एथलीट मशहूर एफिल टावर का लोहा भी अपने साथ घर ले जाने वाले हैं. अब सवाल ये उठता है कि आखिर ऐसा क्यों किया गया है. दरअसल पिछले कई दशकों से एफिल टावर पेरिस की शान है. लोग सबसे ज्यादा पेरिस इस वजह से भी घूमने आते हैं कि वो इस ऐतिहासिक धरोहर को अपनी आंखों से देख पाए. एफिल टावर का निर्माण फ्रांस में 1887 से 1889 के बीच हुआ था. हाल ही में, एफिल टावर से कुछ लोहा निकालकर ओलंपिक के पदक में इस्तेमाल किया गया है. यह पहल एफिल टावर की देखरेख करने वाली कंपनी ने की है, ताकि इस ऐतिहासिक स्मारक की विरासत को एक नई पहचान दी जा सके.

बता दें कि एफिल टावर के लोहे का इस्तेमाल मेडल के बीच में किया गया है. जिसे षटभुज यानी हेक्सागोन का आकार दिया गया है. षटभुज  को गाढ़ा सलेटी से रंगा गया है. मेडल पर जहां एफिल टावर का लोहा लगा है वहां, 'Paris 2024'  लिखा हुआ है. षटभुज के 6 कोनों पर गोल्ड कलर के जेमस्टोन भी लगाए गए हैं, जो मेडल की सुंदरता को नया आयाम दे रहे हैं. अब देखने वाली बात ये है कि एफिल टावर का कितना लोहा हिंदुस्तान आ पाता है, और कितना दुनिया के दूसरे देशों में जाता है.

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