कौन हैं मोहिंदर अमरनाथ जिसने बदल दी टीम इंडिया की किस्मत, 1983 वर्ल्ड कप में निभाया था सबसे बड़ा रोल

Global Bharat 12 Jul 2024 04:53: PM 4 Mins
कौन हैं मोहिंदर अमरनाथ जिसने बदल दी टीम इंडिया की किस्मत, 1983 वर्ल्ड कप में निभाया था सबसे बड़ा रोल

29 जून 2024, भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक ऐसा दिन है, जिसे भारतीय क्रिकेट फैंस कभी भूल नहीं पाएंगे. बारबाडोस की धरती पर टीम इंडिया ने रोहित शर्मा की कप्तानी में टी20 वर्ल्ड कप 2024 का खिताब जीत इतिहास इसी दिन रचा था. वर्ल्ड क्रिकेट में टीम इंडिया का दबदबा इन दिनों साफ तौर पर देखा जाता है. अब एक सवाल का जवाब आप दीजिये, क्या ये दबदबा 10-20 साल के भीतर किये गए प्रयासों का नतीजा है? शायद आपका जवाब भी ना ही होगा, और अगर आपका जवाब ना है तो आप बिल्कुल सही है. आजकल टीम इंडिया का जिस तरीके का दबदबा है, वो सालों साल की मेहनत है. कई खिलाड़ियों द्वारा किये गए प्रयासों का नतीजा है. अब जैसे 29 जून 2024 भारतीय इतिहास में अमर है, वैसे ही 25 जून 1983, 24 सितम्बर 2007 और 2 अप्रैल 2011 भी वो तारीखें हैं, जिसे भारतीय क्रिकेट इतिहास में कभी भुलाया नहीं जा सकेगा.

इन सभी तारीखों में 25 जून 1983 सबसे ऊपर है. ये वो तारीख है, जब भारतीय क्रिकेट टीम ने पहली बार इंग्लैंड की धरती पर वर्ल्ड चैंपियन बनने का गौरव प्राप्त किया था. भारतीय टीम ने उस दौर की शानदार टीम वेस्टइंडीज को फाइनल मैच में हराकर इतिहास के पन्नों पर अपना नाम दर्ज कराया था. उस वक्त टीम के कप्तान थे, लिजेंडरी कपिल देव. कपिल देव की कप्तानी में टीम इंडिया ने वो कारनामा किया था जिसकी कल्पना दुनिया तो छोड़ो भारत में भी किसी ने नहीं की थी. कपिल देव को आज भी इंडियन क्रिकेट में बहुत ऊपर का दर्जा दिया जाता है. लेकिन भारतीय टीम की इस ऐतिहासिक जीत में जितना कपिल देव का हाथ था, शायद उससे भी ज्यादा मोहिंदर अमरनाथ का हाथ था। 

मोहिंदर अमरनाथ, जिन्हें प्यार से 'जिम्मी' कहा जाता है, भारतीय क्रिकेट के एक महान खिलाड़ी हैं. उनका जन्म 24 सितंबर 1950 को पंजाब के पटियाला में हुआ था. उनके पिता, लाला अमरनाथ, भी एक प्रसिद्ध क्रिकेटर थे, जो स्वतंत्र भारत के पहले टेस्ट कप्तान थे. इस प्रकार, क्रिकेट उनके खून में था, और उन्होंने अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए भारतीय क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी.

मोहिंदर अमरनाथ का क्रिकेट करियर उतार-चढ़ाव से भरा रहा. उन्होंने 1969 में अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की, लेकिन उन्हें अपनी जगह पक्की करने में कई साल लगे. मोहिंदर अमरनाथ एक उपयोगी ऑलराउंडर थे, जो अपनी शानदार बल्लेबाजी और उपयोगी मध्यम गति की गेंदबाजी के लिए जाने जाते थे. 

1983 का विश्व कप भारतीय क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ, और इस सफलता के केंद्र में मोहिंदर अमरनाथ थे. इस टूर्नामेंट में उनकी भूमिका बहुत ज्यादा अहम थी. वे न केवल अपने बल्ले से, बल्कि अपनी गेंदबाजी से भी टीम को जीत दिलाने में सहायक रहे. इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में मैच में उन्होंने 46 रन बनाए और 12 ओवर में 27 रन देकर 2 विकेट लिए, जिससे भारत को एक महत्वपूर्ण जीत मिली. इसके बाद 25 जून 1983 को लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ फाइनल मैच में उन्होंने 26 महत्वपूर्ण रन बनाए और 7 ओवर में 12 रन देकर 3 विकेट लिए. सेमीफाइनल और फाइनल, दोनों मैचों में मोहिंदर अमरनाथ को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था. 

मोहिंदर अमरनाथ, भारतीय क्रिकेट में लालजी नाम से विख्यात हैं. मोहिंदर अमरनाथ को ये नाम उनके पिताजी की वजह से दिया गया. उनके पिता लाला अमरनाथ, स्वतंत्र भारत के पहले टेस्ट कप्तान रहे थे. उन्हीं के सम्मान में मोहिंदर अमरनाथ को बाद में लालजी कह कर सम्बोधित किया जाने लगा. साल 2021 में आयी रणवीर सिंह स्टारर फिल्म '83' में कपिल देव की भूमिका के अलावा, 'लालाजी' के रूप में मोहिंदर अमरनाथ का किरदार भी प्रमुखता से दिखाया गया है. फिल्म में 'मिस्टर लाला' के रूप में उनकी भूमिका को सराहा गया है, जो उनके योगदान को यादगार बनाता है.

मोहिंदर अमरनाथ ने अपने क्रिकेट करियर में 69 टेस्ट मैच और 85 वनडे मैच खेले. उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 4378 रन और वनडे में 1924 रन बनाए. उनकी बल्लेबाजी की स्थिरता और विपरीत परिस्थितियों में उनके खेल की समझ ने उन्हें टीम का एक महत्वपूर्ण सदस्य बनाया. लालजी की क्रिकेट यात्रा सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं थी, उन्होंने अपनी मध्यम गति की गेंदबाजी से भी कई महत्वपूर्ण विकेट लिए. अमरनाथ ने टेस्ट क्रिकेट में 32 विकेट और वनडे में 46 विकेट लिए. उनकी गेंदबाजी का मुख्य आकर्षण था उनकी स्विंग गेंदबाजी, जो किसी भी बल्लेबाज को मुश्किल में डाल सकती थी.

अमरनाथ का क्रिकेट करियर कई पीढ़ियों के क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा बना. उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और खेल के प्रति उनके जूनून ने उन्हें एक आदर्श खिलाड़ी बना दिया. 1983 विश्व कप में उनके प्रदर्शन ने भारतीय क्रिकेट को एक नई दिशा दी और देश में क्रिकेट की लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया. 1983 विश्व कप के नायक के रूप में उनकी भूमिका हमेशा याद की जाएगी, और भारतीय क्रिकेट प्रेमी उन्हें हमेशा अपने दिलों में विशेष स्थान देंगे. वे सही मायने में भारतीय क्रिकेट के 'लालाजी' हैं, जिन्होंने देश को गर्व महसूस कराया.

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