...ये हैं ऐशान्या द्विवेदी, जिन्होंने पहलगाम में अपने पति को खोया, और अब पूरे देश से अपील कर रही हैं, पाकिस्तान से जो मैच हो रहा है, उसका बहिष्कार करें. यही बात कांग्रेस सांसद इमरान मसूद समेत पूरा विपक्ष दोहरा रहा है. दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज तो बकायदा पुतला फूंक रहे हैं, लखनऊ से मुंबई तक विरोध ही विरोध हो रहा है, और अब ख़बर है बीसीसीआई के बड़े अधिकारी भी एक तरीके से इसका बॉयकॉट कर रहे हैं.
इनसाइड स्पोर्ट्स दैनिक जागरण के हवाले से लिखता है, ''रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई सचिव देवाजीत सैकिया, आईपीएल चेयरमैन अरुण धूमल, कोषाध्यक्ष प्रभतेज भाटिया और संयुक्त सचिव रोहन देसाई इस मैच के लिए दुबई नहीं जाएंगे. बीसीसीआई के कार्यवाहक अध्यक्ष राजीव शुक्ला के मैच में शामिल होने की संभावना है. वे एशियाई क्रिकेट परिषद के कार्यकारी बोर्ड के सदस्य भी हैं. इसलिए उनसे उम्मीद की जा रही है कि वे मैच देखने के लिए दुबई जाएंगे. आईसीसी के चेयरमैन जयशाह फिलहाल मीटिंग के लिए USA में हैं, इसलिए उनके जाने की संभावना भी न के बराबर है.''
यानि भारत सरकार उस पॉलिसी पर चल रही है कि नियम का पालन भी हो जाए और जनता की भावनाओं का भी ख्याल रखा जाए, लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि जो 11 खिलाड़ी खेलेंगे, उनके घरवालों या उनकी इच्छा के बारे में क्या पूछा गया, या फिर पैसे मिलेंगे, इसलिए उन्हें ड्यूटी के तौर पर खेलना है. क्या पैसों के लिए भावनाओं की कोई कद्र नहीं है. ये सवाल भी लोग पूछ रहे हैं. जब बीते दिनों लीजेंड्स लीग में भारत ने खेलने से इनकार कर दिया था, तो फिर अब दिक्कत कहां थी, अगर पैसे का मामला है तो जो भी 50-100 करोड़ की कमाई इससे बीसीसीआई को होती वो भारतीय चंदा जुटाकर दे सकते थे.
वैसे भी विराट और रोहित नहीं खेल रहे हैं तो ख़बर है मैच से दो दिन पहले तक पूरा टिकट ही नहीं बिक पाया, फिर भी मैच की जिद्द पर सब अड़े हैं. सुप्रीम कोर्ट में याचिका गई तब अदालत ने ये कहकर वापस भेज दिया कि मैच होने दो, इसमें क्या किया जा सकता है. जबकि मोदी सरकार में मंत्री रहे अनुराग ठाकुर इसकी अलग कहानी बताते हैं, वो समझाते हैं मामला पैसे का नहीं बल्कि प्वाइंट्स और नियमों का है.
पर क्या नियम भावनाओं से ऊपर है, जो महाराष्ट्र बाला साहेब ठाकरे के वक्त मैच को लेकर अलग रूख रखता है, खास तौर पर पाकिस्तान से रिश्तों को लेकर भी अलग रवैया अपनाता था, उस महाराष्ट्र में इस मैच को लेकर अलग कहानी चल रही है, वहीं की सरकार में मंत्री नीतेश राणे कहते हैं आदित्य ठाकरे बुर्का पहनकर मैच देखेंगे.
यानि क्रिकेट के बहाने तंज की सियासत जारी है, विपक्षी पार्टियां सरकार पर सवाल उठा रही है, पहलगाम हमले के पीड़ित सरकार से पूछ रहे हैं मैच का नाम आते ही आपका दिल पत्थर क्यों हो गया, जबकि दूसरी तरफ वो लोग भी हैं जो मैच देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, वो सोच रहे हैं जल्दी 14 सितंबर की रात 8 बजे का समय आए और मैच का रोमांच लिया जाए, पर सवाल ये अब भी बरकरार है क्या ये मैच होना चाहिए.