क्या विपक्ष के ‘विभीषण’ बन रहे हैं चंद्रशेखर आजाद? दलित राजनीति, BJP कनेक्शन और बड़े आरोपों पर उठे सवाल

Global Bharat 24 May 2026 12:01: PM 2 Mins
क्या विपक्ष के ‘विभीषण’ बन रहे हैं चंद्रशेखर आजाद? दलित राजनीति, BJP कनेक्शन और बड़े आरोपों पर उठे सवाल

नगीना से सांसद Chandrashekhar Azad इन दिनों फिर चर्चा में हैं। कभी नाम के पीछे ‘रावण’ लगाने वाले चंद्रशेखर अब खुद को बहुजन राजनीति का बड़ा चेहरा बनाने की कोशिश में जुटे दिखाई देते हैं। लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि उनका असली राजनीतिक लक्ष्य क्या है? क्या वे दलितों की आवाज बनना चाहते हैं, मुस्लिम वोटों में पकड़ मजबूत करना चाहते हैं, या फिर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी अलग जमीन तैयार कर रहे हैं?

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि चंद्रशेखर की राजनीति विपक्ष के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। कुछ लोग उन्हें विपक्ष का “विभीषण” तक बता रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि उनकी राजनीति का फायदा कहीं न कहीं BJP को पहुंचता है, क्योंकि वे विपक्षी वोटबैंक में सेंध लगाते दिखते हैं।

हाल ही में चंद्रशेखर ने एक पोस्ट में 2017 के दिल्ली प्रदर्शन को याद करते हुए लिखा कि बहुजन समाज अब अन्याय सहने वाला नहीं है और संघर्ष लगातार जारी रहेगा। उन्होंने इसे बहुजन समाज की “हुंकार” बताया।

हालांकि उनके विरोधी सवाल उठा रहे हैं कि जब दिल्ली के उत्तम नगर में दलित युवक तरुण की हत्या का मामला सामने आया, तब वे मौके पर क्यों नहीं पहुंचे। आरोप लगे कि मुस्लिम वोट नाराज न हों, इसलिए दूरी बनाई गई। हालांकि संसद में उन्होंने इस मुद्दे को उठाया था।

इसके अलावा प्रयागराज हिंसा का मामला भी लगातार चर्चा में है। जून 2025 में उनके हिरासत में लिए जाने की अफवाह के बाद समर्थकों ने सड़क पर हंगामा किया। तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं। पुलिस ने लाठीचार्ज कर हालात संभाले, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में चंद्रशेखर पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि विरोधी लगातार सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कानून का शिकंजा उन तक क्यों नहीं पहुंचता।

मई 2026 में सहारनपुर के लालवाला गांव में तनाव के बाद प्रशासन ने उन्हें हाउस अरेस्ट किया था। इसी महीने ठाकुरद्वारा जाने से भी पुलिस ने रोका था। हालांकि सांसद बनने से पहले वे कई बार जेल जा चुके हैं। 2017 के सहारनपुर हिंसा मामले में उन पर NSA लगाया गया था और करीब 16 महीने जेल में रहे। 2019 में CAA विरोध प्रदर्शन के दौरान भी उन्हें गिरफ्तार किया गया था।

इस बीच Dr Rohini Ghavari द्वारा लगाए गए आरोपों ने विवाद और बढ़ा दिया। रोहिणी घावरी ने सोशल मीडिया पर कई पोस्ट और वीडियो साझा कर चंद्रशेखर पर गंभीर आरोप लगाए और केंद्र सरकार से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष उन्हें बचा रहा है। हालांकि इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

दूसरी तरफ चंद्रशेखर खुद इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हैं। एक वीडियो में उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान विरोधियों ने कहा था कि उन्हें 20 हजार वोट भी नहीं मिलेंगे, फिर कहा गया कि उनकी वजह से BJP जीतेगी, लेकिन जनता ने सबको जवाब दिया।

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या चंद्रशेखर आजाद वास्तव में दलित राजनीति को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं, या फिर उनकी राजनीति विपक्षी दलों के वोटबैंक को कमजोर कर रही है। आने वाले चुनावों में यह साफ हो सकता है कि उनकी रणनीति उन्हें कितना आगे ले जाती है।

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