नई दिल्ली: गुजरात हाई कोर्ट ने पूर्व क्रिकेटर और तृणमूल कांग्रेस सांसद यूसुफ पठान को वडोदरा में सरकारी जमीन पर अतिक्रमणकारी घोषित किया है. विवादित भूखंड को खाली करने का आदेश देते हुए, कोर्ट ने कहा कि सेलेब्रिटीज कानून से ऊपर नहीं हो सकते और उन्हें छूट देना गलत मिसाल कायम करता है. न्यायमूर्ति मोना भट्ट की एकल पीठ ने पिछले महीने यह फैसला सुनाया, जिसमें पठान की याचिका को खारिज कर दिया गया, जिसमें उन्होंने वडोदरा के तांदलजा क्षेत्र में अपने बंगले के बगल में स्थित भूखंड पर नियंत्रण बनाए रखने की मांग की थी.
कोर्ट ने कहा, "एक राष्ट्रीय प्रतिनिधि और सार्वजनिक हस्ती के रूप में, पठान की कानून का पालन करने की जिम्मेदारी और भी बड़ी है. सेलेब्रिटीज, अपनी प्रसिद्धि और सार्वजनिक उपस्थिति के कारण, लोगों के व्यवहार और सामाजिक मूल्यों पर गहरा प्रभाव डालते हैं. ऐसे व्यक्तियों को कानून तोड़ने के बावजूद रियायत देना समाज को गलत संदेश देता है और न्यायिक प्रणाली में जनता का विश्वास कम करता है."
विवाद की शुरुआत 2012 में हुई, जब वडोदरा नगर निगम (VMC) ने तृणमूल सांसद को उनके द्वारा 2012 से कब्जाई गई सरकारी जमीन को खाली करने का नोटिस जारी किया था. पठान ने इस नोटिस को चुनौती दी और गुजरात हाई कोर्ट का रुख किया. हालांकि, कोर्ट ने पाया कि वे भूखंड पर अनधिकृत कब्जे में थे.
अपनी याचिका में, यूसुफ पठान ने कहा कि उन्हें और उनके भाई, पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज इरफान पठान को, अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जमीन खरीदने की अनुमति दी जानी चाहिए. उन्होंने याचिका में कहा, "उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि उन्हें और उनके भाई इरफान पठान, जो दोनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध खेल हस्तियां हैं, को उनके परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भूखंड आवंटित किया जाए."
नगर निगम अधिकारियों ने यूसुफ पठान के अनुरोध का आकलन किया और इसे राज्य सरकार को भेजा, जिसने 2014 में इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया.आधिकारिक अस्वीकृति के बावजूद, उन्होंने संपत्ति पर कब्जा जारी रखा, जिसके कारण आगे की कानूनी कार्रवाई हुई और हाल ही में हाई कोर्ट के आदेश में यह मामला समाप्त हुआ.