Britain election 2024 results: क्या ब्रिटेन में मुस्लिमों और ईसाइयों ने मिलकर एक सनातनी PM को हराया, रिपोर्ट हैरान कर देगी

Global Bharat 06 Jul 2024 3 Mins 1259 Views
Britain election 2024 results: क्या ब्रिटेन में मुस्लिमों और ईसाइयों ने मिलकर एक सनातनी PM को हराया, रिपोर्ट हैरान कर देगी

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री आवास में भगवान बृहस्पतिदेव की पूजा होना, गाय को माता मानना औऱ गंगाजल का छिड़काव होना क्या ब्रिटेन के लोगों को पसंद नहीं आया, ऋषि सुनक जैसा सनातनी व्यक्ति आखिर ब्रिटेन का चुनाव क्यों हार गया, बड़े-बड़े एक्सपर्ट कहते हैं वहां की अर्थव्यवस्था खराब थी, लोग परेशान थे, इसीलिए सुनक की सियासी पारी पर संकट खड़ा हो गया, लेकिन यही एक वजह नहीं थी, बल्कि एक वजह तुष्टिकरण की राजनीति भी है, ब्रिटेन की राजनीति को नजदीक से देखने वाले लोग कहते हैं कि वहां बाहरी वोटर्स का दबदबा भी ज्यादा है.

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जिस तरह से बंगाल चुनाव में बीजेपी की हार में बाहरी वोटर्स की भूमिका रही, ऐसे सवाल उठे. ठीक वैसे ही ब्रिटेन में ऋषि सुनक की हार में बांग्लादेश, पाकिस्तान औऱ हिंदुस्तान के कुछ फीसदी मुसलमानों की भूमिका बताई जा रही है, आंकड़े बताते हैं ब्रिटेन में करीब ढाई फीसदी हिंदू और साढ़े 4 फीसदी मुसलमान हैं. जिनका वोटबैंक ऋषि सुनक के खिलाफ गया.

ये ब्रिटेन के इतिहास में पहली बार हुआ, जब किसी पार्टी ने 400 पार का नारे को पूरा किया, जिसके बाद ट्विटर पर इस बात की चर्चा होने लगी कि नारा मोदीजी ने दिया, लेकिन 400 पार न तो मोदी कर पाए, न सुनक, बल्कि सुनक की विरोधी पार्टी को 412 सीटें मिल गई और नए प्रधानमंत्री के रूप में लेबर पार्टी के नेता किएर स्टार्मर की जीत हो गई. जिसके बाद से हिंदुस्तान में इस बात की चर्चा उठने लगी है कि ब्रिटेन के साथ हमारा जो फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होना था उसका क्या होगा?

क्या होता है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को हिंदी में मुक्त व्यापार समझौता कहते हैं, इससे व्यापार आसान होता है, कई तरह के टैक्स से मुक्ति मिलती है, अगर ये लागू होगा तो ब्रिटेन से सामान मंगवाना और वहां सामान भेजना और सस्ता हो जाएगा. ऋषि सुनक इस ओर कदम आगे बढ़ा रहे थे क्योंकि उन्हें पता था भारत इस वक्त दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है, यही बात लेबर पार्टी के नेता और नए प्रधानमंत्री को भी चुनाव के दौरान ही समझ आ गई थी, इसीलिए ब्रिटेन का चुनाव पहली बार इस मुद्दे पर लड़ा गया कि भारत से मुक्त व्यापार समझौते का क्या होगा.

दोनों पार्टियों ने अपने घोषणापत्र में इस मुद्दे को रखा था. मोदी सरकार में मंत्री पीयूष गोयल और निर्मला सीतारमण का नाम लेकर स्टार्मर ने कहा था कि इसके लिए भारत तैयार रहे. भारत और इंग्लैंड के बीच डिफेंस से लेकर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी अब कई अहम समझौते होने की उम्मीद है, हालांकि नए वाले प्रधानमंत्री का भारत से कोई जुड़ाव नहीं है, जैसा कि ऋषि सुनक का था.

ऋषि सुनक भारतीय मूल के हैं, उनकी शादी इंडिया के दिग्गज बिजेनसमैन इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति की बेटी अक्षता मूर्ति से हुई है, इसीलिए ब्रिटेन में जब सुनक की ताजपोशी हुई थी तो हिंदुस्तान में भी जश्न मना था, सुनक की प्रसिद्धि दुनियाभर में बढ़ी थी, जिसे शायद कुछ यूरोपियन लोग पचा नहीं पाए, हालांकि सुनक की हार का कारण सिर्फ ये नहीं है, बल्कि कंजरवेटिव पार्टी के दिग्गज नेता सुनक को विरासत में जो सत्ता मिली थी.

पूर्व पीएम बोरिस जॉनसन औऱ लिज ट्रस ने जो गलतियां की थी. वो भी हार एक बड़ी वजह रही है. कभी भी किसी नेता की हार एक-दो मुद्दों पर नहीं टिकी होती, पर सवाल तब उठते हैं जब एक तबका किसी खास नेता को हराने के लिए अपना पूरा जोर लगा देता है, पहले ये बात हिंदुस्तान में हुई और फिर ब्रिटेन से ऐसी तस्वीर सामने आई तो हर कोई ये पूछने लगा कि क्या दुनियाभर में मजबूत हो रही सनातन के पहचान से कुछ लोगों को पीड़ा हो रही है. 

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