बहुजन समाज पार्टी प्रमुख Mayawati ने 24 मई को पार्टी मुख्यालय में बड़ी बैठक कर 2027 यूपी विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया। इस बैठक में बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक के पदाधिकारियों को बुलाया गया और जमीनी रिपोर्ट ली गई। माना जा रहा है कि बसपा अब पूरी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
बैठक में मायावती ने कार्यकर्ताओं को दो नए नारे भी दिए, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी।
बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा Akash Anand को लेकर रही। पार्टी के अंदर नई टीम तैयार करने और युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई जा रही है। माना जा रहा है कि बसपा अब दलित युवाओं को दोबारा जोड़ने की कोशिश में जुट गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर बसपा अकेले चुनाव लड़ती है तो इसका असर विपक्षी गठबंधन पर पड़ सकता है। खासकर Akhilesh Yadav के PDA समीकरण और दलित वोटबैंक पर इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। वहीं Chandrashekhar Azad की राजनीति पर भी इसका प्रभाव पड़ने की चर्चा है।
मायावती ने बैठक में बूथ मैनेजमेंट को सबसे अहम बताया। बीजेपी की तरह बूथ स्तर पर मजबूत संगठन बनाने पर जोर दिया गया। विधानसभा, जिला और सेक्टर स्तर के प्रभारियों से रिपोर्ट मांगी गई कि कितने नए लोग पार्टी से जुड़े और किन इलाकों में पार्टी की पकड़ कमजोर हुई है।
बसपा प्रमुख ने यह भी कहा कि कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों को 2007 की सरकार की याद दिलाएं, जब सर्वसमाज को सम्मान और भागीदारी मिली थी। पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि बसपा अभी भी यूपी की राजनीति में बड़ी ताकत बन सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बसपा का कोर दलित वोटबैंक अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अगर मायावती और आकाश आनंद कार्यकर्ताओं में दोबारा ऊर्जा भरने में सफल रहे तो 2027 का चुनाव काफी दिलचस्प हो सकता है।