PoK में प्रदर्शन, पाकिस्तान सरकार पर दमन के आरोप, असीम मुनीर की भूमिका पर उठे सवाल

Global Bharat 09 Jun 2026 09:02: PM 2 Mins
PoK में प्रदर्शन, पाकिस्तान सरकार पर दमन के आरोप, असीम मुनीर की भूमिका पर उठे सवाल

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में हाल के दिनों में हुए प्रदर्शनों और उसके बाद की घटनाओं ने एक बार फिर पाकिस्तान सरकार और सेना की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय संगठनों और प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों पर सख्ती की जा रही है और विरोध को दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया।

रिपोर्टों के मुताबिक, शाहजैब हबीब नाम के एक प्रदर्शनकारी की मौत के बाद आयोजित शोकसभा और विरोध प्रदर्शनों के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग घायल हुए, कई लोगों को हिरासत में लिया गया और कुछ लोगों के लापता होने की भी खबरें सामने आईं। हालांकि इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से नहीं हो सकी है।

स्थानीय संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार ने उन लोगों पर दबाव बढ़ाया है जो PoK में प्रशासनिक नीतियों, आर्थिक संकट और शासन व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। कई जगहों पर आजादी और अधिकारों से जुड़े नारे भी सुनाई दिए, जिससे क्षेत्र का राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि अक्टूबर 2025 के उस समझौते से जुड़ी बताई जा रही है, जिसे मुजफ्फराबाद समझौता कहा गया था। उस समय पाकिस्तान सरकार, PoK प्रशासन और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बीच बातचीत हुई थी। समझौते में गेहूं और बिजली पर सब्सिडी, आंदोलन में मारे गए लोगों के परिवारों को मुआवजा तथा विकास संबंधी कई वादे किए गए थे।

आलोचकों का आरोप है कि आर्थिक संकट से जूझ रही पाकिस्तान सरकार इन वादों को पूरी तरह लागू नहीं कर सकी। इसके बाद आंदोलनकारी समूहों और प्रशासन के बीच टकराव बढ़ने लगा। कुछ संगठनों का दावा है कि जिन समूहों से पहले बातचीत की जा रही थी, बाद में उन्हीं पर सख्ती शुरू कर दी गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। आर्थिक संकट, महंगाई, आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता, बलूचिस्तान की स्थिति और अफगान सीमा पर सुरक्षा चुनौतियां पहले से मौजूद हैं। ऐसे में PoK में बढ़ता असंतोष सरकार के लिए नई मुश्किलें पैदा कर सकता है।

भारत में भी समय-समय पर PoK को लेकर राजनीतिक बयान सामने आते रहे हैं। केंद्रीय नेताओं ने कई अवसरों पर PoK को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया है। हालांकि इस विषय पर किसी प्रकार की आधिकारिक समय-सीमा या विशेष योजना सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं की गई है।

फिलहाल PoK की स्थिति पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है। आने वाले समय में पाकिस्तान सरकार इस असंतोष से कैसे निपटती है और स्थानीय जनता की मांगों पर क्या रुख अपनाती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

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