Paris Olympics 2024: कौन है स्वप्निल कुसाले, जिसने भारत को दिलाया तीसरा पदक?

Global Bharat 01 Aug 2024 02:16: PM 2 Mins
Paris Olympics 2024: कौन है स्वप्निल कुसाले, जिसने भारत को दिलाया तीसरा पदक?

पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत की झोली में तीसरा ब्रॉन्ज़ आ गया है. तीनों मेडल निशानेबाजी में आयी है. भारतीय निशानेबाजी में एक नया सितारा उभर कर सामने आया है - स्वप्निल कुसाले. उन्होंने पेरिस ओलंपिक 2024 में 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन इवेंट में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है. स्वप्निल 50 मीटर राइफल के फाइनल में पहुंचने वाले पहले निशानेबाज हैं. ऐसे में उनसे देश को बहुत उम्मीदें थी और उन उम्मीदों पर स्वप्निल खरे उतरे. 

स्वप्निल कुसाले का जन्म 1995 में महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के कम्बलवाड़ी गांव में हुआ था. एक किसान परिवार में जन्में स्वप्निल ने 2009 में महाराष्ट्र सरकार के खेल प्राथमिक कार्यक्रम 'क्रीड़ा प्रबोधिनी' में प्रवेश लिया. यहां एक साल की कठोर फिसिकल ट्रेनिंग के बाद उन्होंने निशानेबाजी को अपने खेल के रूप में चुना. इस दौरान, उन्होंने मेहनत और लगन से खुद को साबित किया और धीरे-धीरे इंटरनेशनल मंच पर अपनी पहचान बनाई.

स्वप्निल के करियर की शुरुआत 2012 में हुई जब उन्होंने इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया. लेकिन, उनकी ओलंपिक यात्रा का सपना पूरा होने में उन्हें 12 साल का लंबा समय लगा. 2015 में, उन्होंने कुवैत में आयोजित एशियाई शूटिंग चैंपियनशिप में जूनियर श्रेणी में 50 मीटर राइफल प्रोन 3 पोजीशन इवेंट में गोल्ड जीता. इसके बाद, 59वीं राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने गगन नारंग और चैन सिंह को हराकर गोल्ड जीता. 2017 में, उन्होंने 61वीं राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में भी 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया.

स्वप्निल की ओलंपिक जर्नी में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 2022 में आया जब उन्होंने काहिरा, मिस्र में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में चौथा स्थान हासिल कर ओलंपिक कोटा जीता. ओलंपिक कोटा किसी भी एथलीट के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह देश के लिए ओलंपिक में भाग लेने का अधिकार दिलाता है. हालांकि, अंतिम टीम चयन के लिए और भी ट्रायल्स होते हैं और स्वप्निल को अपने हाई स्कोर के कारण अंतिम टीम में शामिल किया गया.

स्वप्निल का जीवन संघर्ष और धैर्य की मिसाल है. वे भारतीय रेलवे में टिकट कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं, जैसा कि भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ी एम.एस. धोनी भी अपने करियर के शुरुआती दिनों में थे. स्वप्निल धोनी से बहुत प्रेरित हैं और उनकी शांत और धैर्यपूर्ण व्यक्तित्व को अपने जीवन में अपनाने की कोशिश करते हैं. स्वप्निल की सफलता का श्रेय उनकी कठिन मेहनत, परिवार के समर्थन और उनके कोच को जाता है.

स्वप्निल का ओलंपिक में कांस्य पदक जीतना भारतीय निशानेबाजी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. उनके इस प्रदर्शन ने न केवल उन्हें, बल्कि पूरे देश को गर्वित किया है. उनका यह सफर भविष्य के युवा निशानेबाजों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा और उन्हें यह विश्वास दिलाएगा कि मेहनत और समर्पण से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है.

स्वप्निल कुसाले का यह सफर एक उदाहरण है कि कैसे संघर्ष और मेहनत से किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है. उनका यह पदक केवल एक पदक नहीं है, बल्कि उन सपनों की जीत है जो उन्होंने अपनी मेहनत और धैर्य से साकार किए हैं. यह भारतीय खेल जगत के लिए एक नई सुबह की तरह है, जो हमारे खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर और भी अधिक सफलता की ओर अग्रसर करेगा.

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