टीम इंडिया और ऑस्ट्रेलिया के बीच मेलबर्न में चौथे टेस्ट मैच के दौरान एक बड़ा विवाद सामने आया, जब भारतीय ओपनर यशस्वी जयस्वाल के खिलाफ अंपायर के निर्णय को लेकर हंगामा मच गया. इस विवाद ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी और कुछ नियमों पर सवाल उठाए गए.
यशस्वी जयस्वाल का विवादास्पद आउट:
यशस्वी जयस्वाल ने 71वें ओवर की छठी गेंद पर पैट क्यूमिंस की गेंद पर रिवर्स शॉट खेलने की कोशिश की. गेंद विकेटकीपर एलेक्स केरी के हाथों में चली गई, और ऑस्ट्रेलियाई टीम ने एलबीडब्ल्यू की अपील की. अंपायर ने इसे नकारते हुए यशस्वी को नॉट आउट करार दिया. हालांकि, क्यूमिंस ने डीआरएस लिया, जिसके बाद तीसरे अंपायर ने इस निर्णय को पलटते हुए यशस्वी को आउट कर दिया.
तीसरे अंपायर का निर्णय
तीसरे अंपायर ने रिप्ले के दौरान स्निको मीटर की जांच की, लेकिन इसमें कोई हलचल नहीं दिखी, जो यह दर्शाता है कि गेंद ने बैट के किनारे को नहीं छुआ. इसके बावजूद, तीसरे अंपायर ने ऑन-फील्ड अंपायर के निर्णय को बदल दिया, जिससे सभी हैरान रह गए. क्रिकेट के दिग्गज कमेंटेटर सुनील गावस्कर और इरफान पठान ने भी इस फैसले पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि स्निको मीटर में कोई हलचल नहीं दिखी, इसलिए यशस्वी को आउट नहीं दिया जाना चाहिए था.
भारतीय दर्शकों का गुस्सा
यह निर्णय भारत के क्रिकेट प्रशंसकों के लिए बहुत निराशाजनक था. मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में मौजूद 30,000 से अधिक दर्शकों ने इसका विरोध किया और "चिटिंग-चिटिंग" के नारे लगाने लगे. यह नजारा बहुत ही अजीब था, क्योंकि यशस्वी की आउट होने की स्थिति को लेकर सारा स्टेडियम भ्रमित था.

क्रिकेट नियमों पर सवाल
इस मामले ने क्रिकेट के नियमों और डीआरएस प्रणाली पर भी सवाल उठाए. स्निको मीटर को एक अहम तकनीकी उपकरण माना जाता है, जिसका उद्देश्य यह तय करना होता है कि गेंद ने बैट के किनारे को छुआ है या नहीं. अगर स्निको मीटर में कोई हलचल नहीं दिखती, तो यह माना जाता है कि गेंद ने बैट के किनारे को नहीं छुआ, और बल्लेबाज को नॉट आउट करार दिया जाना चाहिए. यशस्वी के मामले में, यह हलचल नहीं थी, फिर भी उन्हें आउट दिया गया, जो कि नियमों का उल्लंघन था.
पिछला मामला: केएल राहुल
यह विवाद मेलबर्न टेस्ट से पहले हुए एक अन्य विवाद से मेल खाता है. पहले टेस्ट मैच में, भारत के ओपनर केएल राहुल के आउट होने पर भी एक विवाद खड़ा हुआ था. उस समय भी स्निको मीटर का सही इस्तेमाल नहीं किया गया था, और तीसरे अंपायर ने ऑन-फील्ड अंपायर के निर्णय को बदल दिया था.