नई दिल्ली: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस पर प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लगते ही दिल्ली हाईकोर्ट ने गंभीर संज्ञान लिया है. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 20 और 21 जुलाई की घटना से संबंधित सभी CCTV फुटेज, वीडियोग्राफी और अन्य सबूत संरक्षित रखने का आदेश दिया है.
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने कहा कि ये आरोप कोई ‘एकल घटना’ नहीं लगते, इसलिए अधिकारियों को औपचारिक जवाब देना चाहिए.
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान संसद की ओर मार्च निकालने पर पुलिस ने बिना उचित चेतावनी दिए लाठीचार्ज, आंसू गैस, इलेक्ट्रिक बैटन और शारीरिक हमले किए. उन्होंने दावा किया कि 90 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए और महिलाओं के साथ छेड़छाड़ भी हुई. याचिकाकर्ताओं ने शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने, SIT गठन और इलेक्ट्रॉनिक सबूत संरक्षित करने की मांग की है.
सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि प्रदर्शन हिंसक हो गया था, प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और कई पुलिसकर्मी घायल हुए. उन्होंने दावा किया कि Section 144 लागू थी और याचिकाएं सिर्फ पब्लिसिटी के लिए दायर की गई हैं.
कोर्ट ने 11 सितंबर को मामले की अगली सुनवाई तय की है. इस बीच दोनों पक्षों को अपना लिखित जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया है. यह मामला परीक्षा पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन का हिस्सा है, जो अब कानूनी और राजनीतिक विवाद में बदल चुका है.