नई दिल्ली: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के होम डिस्ट्रिक्ट नागपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्थानीय निकाय चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया है. रविवार को आए नतीजों में भाजपा ने विरोधी पार्टियों को पीछे छोड़ते हुए जिले की 15 नगर पालिकाओं में से 12 पर जीत हासिल कर ली है. इस बड़ी सफलता से नागपुर में पार्टी का मजबूत दबदबा साफ हो गया है. वहीं, कांग्रेस, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना और शरद पवार गुट की एनसीपी को केवल एक-एक नगर पालिका मिली है.
इस चुनाव की खास बात यह थी कि महायुति और महाविकास अघाड़ी के सहयोगी दल यहां एक-दूसरे के खिलाफ अलग-अलग मैदान में उतरे. कई जगहों पर भाजपा को अपनी ही गठबंधन पार्टियों—शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी—से सीधा मुकाबला करना पड़ा. भाजपा ने शुरू से ही अकेले लड़ने का फैसला लिया था, जिसका फायदा अब 12 जगहों पर पार्टी के मेयर बनने के रूप में दिख रहा है. ज्यादातर सीटों पर मुख्य टक्कर कांग्रेस से ही रही.
कामठी, सावनेर, उमरेड, खापा, वाडी और कलमेश्वर जैसी महत्वपूर्ण नगर पालिकाओं में भाजपा के प्रत्याशी नगराध्यक्ष बने हैं. जिले की सभी 12 नगर पंचायतों में भी महायुति के उम्मीदवार विजयी हुए हैं. ध्यान देने वाली बात यह है कि नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का मुख्यालय स्थित है.
दूसरी ओर, काटोल में शरद पवार वाली एनसीपी ने जीत दर्ज की, जबकि रामटेक में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने अपनी सीट बचाए रखी. कांग्रेस को सिर्फ एक नगर पालिका मिली है.
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और नागपुर के संरक्षक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के इलाके कामठी में पार्टी ने पहली बार कब्जा जमाया है. यहां दलित और मुस्लिम वोटरों को साधने की रणनीति काम आई, हालांकि स्थानीय स्तर पर सत्ता-विरोधी लहर की भी बातें हो रही हैं.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुनील केदार के गढ़ सावनेर में भी भाजपा ने उन्हें फिर से हराया और नगराध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिया.
बताते चलें कि नागपुर जिले में कुल 27 अध्यक्ष और 540 पार्षदों का चुनाव हुआ था—15 नगर परिषदों से 15 अध्यक्ष व 345 पार्षद, तथा 12 नगर पंचायतों से 12 अध्यक्ष व 204 पार्षद. मतदान प्रतिशत औसतन 61 फीसदी रहा. साल 2017 के चुनावों में भी भाजपा ने यहां दो-तिहाई से ज्यादा सीटें जीती थीं, और इस बार भी उसका प्रदर्शन शानदार रहा है.