उत्तर प्रदेश ऐसा राज्य है, जहां से सत्ता और विपक्ष दोनों की अहम हस्तियां मैदान में हैं, लेकिन वोट की खातिर रैलियों, सभाओं में खूब गरजने वाले जनप्रतिनिधि पिछले पांच सालों तक विधानसभा में मौन रहे. योगी सरकार में कुछ ऐसे भी विधायक हैं, जो काम तो कुछ करते नहीं लेकिन जनता को लूटने में उनकी रूची सबसे ज्यादा है. इनको विधायकी मिली तो ये जनता को ही भूल गए, लेकिन इन्होंने अपने खजाने में दिन दोगुनी और रात चौगुनी कमाई शुरू कर दी. ये को आपको पता ही होगा कि वर्तमान में अठारहवीं विधान सभा का गठन 11 मार्च, 2022 को हुआ, तब से लेकर अब तक कुछ विधायक तो ऐसे रहे जिन्होंने सदन में रहकर भी अपनी मौजूदगी दर्ज नहीं कराई. ये वो विधायक हैं जिन्होंने सदन में कभी कोई सवाल नहीं पूछा. सबसे पहले बात करेंगे उन विधायकों की जिन्होंने जनता को दरकिनार कर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया.
बेदी राम, विधायक- बेदी राम गाजीपुर की जखनियां सीट से सुभासपा पार्टी के विधायक है और आजमगढ़ के रहने वाले हैं. बेदी राम के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में केस भी दर्ज हैं. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के इस विधायक के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुआ है. बेदी राम पेपर लीक मामले में भी कई आरोप लग चुके हैं. इनके वायरल हो रहे एक वीडियो ने इन्हें मुसीबत में डाल दिया. वीडियो से साफ जाहिर था कि इन्होंने काम काज तो कुछ खास किया नहीं, लेकिन पेपर लीक कर करोड़ों का साम्राज्य खड़ा कर लिया. इतना ही नहीं 21 अगस्त 2014 को यूपी एसटीएफ गैंगस्टेर एक्ट में बेदी राम की लखनऊ व जौनपुर की 8 प्रॉपर्टी कुर्क कर चुकी है. बहराहाल वो कई बार कई टीवी चैनल पर आकर कह चुके हैं कि वो दलित हैं कमजोर हैं इसलिए उन्हें कोई फंसाना चाहता है, पर हम बस इतना ही कहेंगे कि ये जनता है बॉस सब जानती है.
निषाद पार्टी के विधायक विपुल दुबे- रेलवे ग्रुप डी की भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामले में ये दूसरे नंबर के विधायक भी आरोपी है और इनके खिलाफ भी गैर-जमानती वारंट जारी हुआ है. इनकी खूबी जानने से पहले इनका परिचय आपको बताते हैं. ये भदोही की ज्ञानपुर सीट से निषाद पार्टी के विधायक हैं. STF ने साल 2006 में इनको विधायक बेदी राम के गिरफ्तार भी किया था. आज से 2 साल पहले इनका एक वीडियो भी वायरल हुआ था. जिसमें ये दबंग विधायक एक युवक भद्दी भद्दी गलियां देते हुए बुरी तरह से पीट रहे थे. विधायक बेदी राम की तरह इन्होंने ने भी पेपर लीक कराने में हाथ जमा लिए थे. लेकिन वो कहने हैं ना बकरे की मां कब तक खैर मनाएं. एक ना एक दिन संरक्षण छुटेगा बेटे के साथ हलाल कर दी जाएगी.
भाजपा के नहटौर विधायक ओम कुमार- ओम कुमार एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं और वे 18वीं विधान सभा के सदस्य भी और इससे पहले वे उत्तर प्रदेश भारत की 17वीं विधान सभा और 16वीं विधानसभा का हिस्सा भी चुके हैं. इन्होंने इस बार नगीना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. तीन बार के विधायक रह चुके ओम कुमार को आजाद समाज पार्टी के सुप्रीमो चंद्रशेखर से करारी हाल झेलनी पड़ी. जनता ने अपनी नाराजगी जाहिर कर इनको जीतने नहीं दिया तो उन्होंने जनता के खिलाफ ही मौर्चा खोल दिया. विधायक साहब अपने भाषण ये कहते हुए सुने गए कि वोट नहीं तो काम नहीं. यानी जिन लोगों ने उन्हें वोट नहीं दिया उनकी वह न तो सुनवाई करेंगे, न ही उनके लिए कोई काम करेंगे. विधायक का रूप कहीं ना कहीं योगी सरकार के लिए खतरें की घंटी बन सकता है.
विधायक अमरेश कुमार- कुछ विधायक लगातार विधानसभा में कुर्सी घेरे बैठे रहे लेकिन आज तक एक भी सवाल उनके मुह से नहीं फूटा. बल्कि जिले में जनहित के तमाम मुद्दे होने के बावजूद उन्होंने सदन में सरकार से सवाल पूछने की रुचि नहीं दिखाई और अगर गलती से पूछ भी लिया तो उस सवाल के कोई माइने नहीं थे. इनमें लखनऊ की एक विधानसभा सीट से विधायक बने अमरेश कुमार ने भी सदन में मुंह नहीं खोला है.
विधायक अशोक राणा- चार बार के बीजेपी विधायक अशोक राणा के साथ 5 बार के विधायक बावन सिंह ने अभी तक चुप्पी नहीं तोड़ी है. पहली बार विधायक के तौर पर चुने गए पेशे से डॉक्टर असीम कुमार भी शामिल हैं.
दिलचस्प बात तो ये भी है कि सभी पार्टियों के पहली बार चुन कर आए 126 विधायकों में 113 अब तक बोल चुके हैं और मात्र 13 पहली बार चुने गए विधायक बोलने से बचे हैं. उन्होंने अभी तक कोई बात विधानसभा के पटल पर नहीं रखी है. 13 के अलावा बाकी 26 पूर्व में भी विधायक रह चुके हैं और उन्होंने अभी तक सदन में एक भी बार नहीं बोला है.
दरअसल जिले में जनहित के तमाम मुद्दे होने के बावजूद इन विधायकों ने सदन में सरकार से सवाल पूछने की रुचि नहीं दिखाई. जोकी योगी सरकार के लिए चिंता का विषय है. बहरहाल अब देखना ये होगा लोकसभा चुनाव में भीतर घात का शिकार हुई बीजेपी क्या आगामी चुनाव में इन चुप्पी साधें विधायकों की वजह से बीच मजधार में ही लटक जाएगी.