नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर एक बार फिर गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसमें उन्होंने कहा कि अगर यह युद्ध जल्द खत्म नहीं हुआ तो यह वैश्विक स्तर पर फैल सकता है और तीसरा विश्व युद्ध छिड़ सकता है. व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने हाल के हफ्तों में हुई भारी तबाही का जिक्र किया, जहां पिछले महीने अकेले करीब 25,000 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर सैनिक थे, लेकिन आम नागरिक भी इसकी चपेट में आए. उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी घटनाएं देखना असहनीय है और अमेरिका इस युद्ध को समाप्त करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है, क्योंकि खेल-खेल में यह WW3 का रूप ले सकता है.
ट्रंप की इस टिप्पणी से पहले व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि राष्ट्रपति दोनों पक्षों से निराश हैं, खासकर उन बैठक से जो बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो रही हैं. चार साल से चली आ रही इस जंग में अमेरिका मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, लेकिन अब ट्रंप एक्शन की मांग कर रहे हैं, न कि सिर्फ बातचीत की. उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हाल ही में फोन पर चर्चा की, जिसके बाद दोनों देशों ने तत्काल वार्ता शुरू करने का ऐलान किया. ट्रंप ने एक 28-सूत्री शांति योजना भी पेश की है, जिसमें यूक्रेन की संप्रभुता, सुरक्षा व्यवस्था, पुनर्निर्माण और रूस की वैश्विक बहाली जैसे मुद्दे शामिल हैं. इस योजना में क्रीमिया, डोनेट्स्क व लुहांस्क को रूस का हिस्सा मानने, यूक्रेन को परमाणु हथियार न रखने और नई सीमाओं के निर्धारण का प्रस्ताव है.
इसके अलावा, ट्रंप ने यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य मदद पर रोक लगा दी है, जिससे उसकी लड़ाकू क्षमता काफी कम हो गई है. उनका कहना है कि इससे यूक्रेन पर रूस के साथ समझौते का दबाव बनेगा. उन्होंने यूरोपीय नेताओं से भी अपील की है कि वे यूक्रेन की सुरक्षा में ज्यादा हिस्सेदारी लें. लेकिन इसी बीच हालात और बिगड़ने के संकेत मिले हैं, जब यूक्रेन ने कैस्पियन सागर में रूस के लुकोइल कंपनी के तेल प्लेटफॉर्म पर पहली बार ड्रोन हमला किया. यह हमला रूस की सबसे बड़ी तेल खदान का हिस्सा है, जिससे उत्पादन ठप हो गया और 20 से ज्यादा कुओं पर असर पड़ा. यूक्रेन का मकसद रूस की तेल कमाई पर चोट पहुंचाना है, क्योंकि युद्ध के लिए मॉस्को इसी से भारी फंड जुटा रहा है. अगस्त से नवंबर तक यूक्रेन ने रूस के कम से कम 77 ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया, जो साल के पहले हिस्से से दोगुना है.
रूस ने अब तक इन हमलों को ज्यादा तवज्जो न दी, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे मॉस्को की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा और पुतिन को बड़ा कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ सकता है. इसी क्रम में नाटो प्रमुख मार्क रुट्टे ने बर्लिन में चेतावनी दी कि रूस का अगला निशाना नाटो सदस्य देश हो सकते हैं, और संघ पांच साल के अंदर हमले के लिए तैयार रहने को कहा. उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों से रक्षा खर्च बढ़ाने की अपील की, ताकि पूर्वजों के जमाने जैसी जंग से बचा जा सके. दुनिया एक बार फिर बड़े खतरे की कगार पर खड़ी नजर आ रही है, जहां शांति प्रयास कमजोर पड़ते दिख रहे हैं.