Uttar Pradesh Politics: मोदी का उत्तराधिकारी कौन वाला सवाल अब कुछ समय के लिए गौण हो गया है, नया सवाल जो सोशल मीडिया पर पूछा जा रहा है, वो है योगी क्या 2027 में यूपी के सीएम फिर बनेंगे, क्योंकि यूजीसी का कानून जब आया तो इसे योगी के खिलाफ से भी जोड़कर देखा गया, कुछ दिनों पहले कई ऐसी सियासी और धार्मिक घटनाएं हुईं, जिसे लेकर योगी पर सवाल उठे, पर हर बार योगी ने नए अंदाज में उसका जवाब दिया...
फिलहाल यूजीसी कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने कानून पर रोक लगा दी है, लेकिन उससे पहले ही शाह और योगी की सीक्रेट मीटिंग ने विरोधियों को बड़ा संदेश दिया है...चौंकाने वाली बात ये थी कि जो केशव प्रसाद मौर्य दिल्ली के करीबी कहे जाते हैं, जिन्हें योगी की कुर्सी का दावेदार कहा जाता है, वो इस मीटिंग में नहीं पहुंचे, शाह खुद दिल्ली से चलकर लखनऊ जाते हैं, शुरुआती कार्यक्रम में केशव मौर्य शाह के साथ दिखाई देते हैं, जिसकी तस्वीरें भी सामने आती है, पर मीटिंग के वक्त कमरे में सिर्फ योगी आदित्यनाथ, यूपी बीजेपी से जुड़े गिने-चुने नेता और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक होते हैं...जानकार बताते हैं मीटिंग में तीन बातों पर मंथन हुआ...
यानि जो लोग शंकराचार्य विवाद के बाद केशव प्रसाद मौर्य के बयान को अलग नजरिए से देख रहे थे, संत बनाम बीजेपी का नैरेटिव गढ़ने की कोशिश कर रहे थे, उन्हें भी शाह ने स्पष्ट संदेश दिया है संत योगी के नेतृत्व में यूपी का विकास तेजी से हो रहा है, और योगी ही यूपी में रहेंगे...
मजेदार बात ये रही कि योगी मंच से पीएम मोदी का संदेश भी पढ़ते हैं, जिसे लेकर सियासी गलियारों में तरह-तरह की चर्चा शुरू हो चुकी है, पर एक बात तो साफ है योगी के विकास मॉडल से दिल्ली गदगद है, और फिलहाल योगी की कुर्सी पर कोई आंच नहीं दिखती, अगर कोई कहानियां गढ़ रहा तो ये उसके मन की उपज है.... शाह से पहले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से भी योगी की कई मीटिंग हुई, और अंत में यही संदेश सामने आया कि योगी का विरोध मतलब पार्टी लाइन से विद्रोह...
राजनीति के जानकार कहते हैं यूपी में बीजेपी को सत्ता में रहना है तो योगी का विरोध करने वालों को सख्त संदेश देना ही होगा..योगी कई बार एक नारा देकर पूरा चुनाव पलटकर दिखा चुके हैं...इस वक्त विपक्ष की रणनीति ऐसी बिखरी हुई है कि अखिलेश PDA के नाम पर जातीय समीकऱणों में उलझे हैं, जबकि ओवैसी यूपी में मुस्लिम वोटबैंक में सेंध लगाकर सपा को बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं...जबकि मायावती बीजेपी को लेकर इतना संतुलित बयान दे रही हैं कि बसपा के मजबूत होने का मतलब अखिलेश को नुकसान होना तय माना जा रहा है...