नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया है कि कृषि भवन परिसर में स्थित 100 साल से अधिक पुरानी कादीमी मस्जिद को सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत हटाया जाएगा. सरकार का कहना है कि सरकारी कार्यालय परिसर में स्थायी धार्मिक ढांचा रखना अस्वीकार्य और सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के अनुकूल नहीं है.
भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया कि कृषि भवन और सेंट्रल सचिवालय परिसर सरकारी, प्रशासनिक और सार्वजनिक सेवा कार्यों के लिए हैं. मस्जिद डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड पर सरकारी जमीन पर स्थित है और 1940 के समझौते के तहत देखभाल समिति को केवल अनुमति-आधारित कब्जा दिया गया था.
सरकार ने वैकल्पिक जमीन देने से भी इनकार किया और कहा कि दो किलोमीटर के दायरे में एक और मस्जिद मौजूद है. याचिका कादीमी मस्जिद की देखभाल समिति ने दायर की थी, जिसमें विध्वंस रोकने या वैकल्पिक प्रार्थना सुविधा की मांग की गई थी. वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने अनुच्छेद 25 का हवाला दिया.
2 नवंबर को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अनिश दयाल ने केंद्र से पूछा कि क्या कोई नियम सरकारी परिसर में किसी समुदाय के लिए प्रार्थना की जगह देने पर रोक लगाते हैं. अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी. मस्जिद 1970 में दिल्ली वक्फ बोर्ड द्वारा वक्फ संपत्ति अधिसूचित की गई थी और सरकारी कर्मचारियों द्वारा प्रार्थना के लिए इस्तेमाल होती रही है.