तेलअवीव इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सालों से अरब पार्टियों को राजनीतिक खतरा बताते रहे हैं. उन्होंने कभी ‘बीबी या तिबी’ का नारा भी दिया था. अब वही अरब पार्टियां उनकी सत्ता खत्म करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं. 27 अक्टूबर के चुनाव में नेसेट (संसद) में किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला.
नेतन्याहू के दक्षिणपंथी गुट को 53 सीटें मिलीं, जबकि पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्ष को 48 सीटें. अरब पार्टियों के पास कुल 19 सीटें हैं, जॉइंट लिस्ट के 11 और राअम के 8 इनके समर्थन से विपक्ष की संख्या 67 हो सकती है, जो सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 से ज्यादा है.
अरब पार्टियों का ऑफर
जॉइंट लिस्ट के वरिष्ठ नेता अहमद तिबी ने एसोसिएटेड प्रेस से कहा, “हम इस आपराधिक सरकार को हटाने के लिए वो सब करना चाहते हैं जो पहले नहीं किया.” उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी विपक्षी सरकार को संसदीय समर्थन दे सकती है, लेकिन गठबंधन में शामिल होकर मंत्री पद नहीं लेगी. यह इजरायली राजनीति में बड़ा बदलाव है. अरब पार्टियां आमतौर पर सत्ता से दूर रहती थीं. 2021 में राअम पार्टी ने पहली बार गठबंधन में शामिल होकर नेतन्याहू के 12 साल के शासन को खत्म करने में मदद की थी.
आइजनकोट ने रखी शर्तें
आइजनकोट ने सहयोग के लिए शर्तें रखी हैं, इजरायल को यहूदी और लोकतांत्रिक राज्य मानना, स्वतंत्रता घोषणापत्र के मूल्यों को स्वीकार करना, सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा और हमास को आतंकी संगठन मानना. तिबी का कहना है कि अगर सिर्फ संसदीय समर्थन दिया जाए तो ये शर्तें लागू नहीं होनी चाहिए. अब देखना है कि विपक्ष अरब समर्थन स्वीकार करता है या नहीं. अगर ऐसा होता है तो नेतन्याहू की लंबी सत्ता खत्म हो सकती है.