जातिगत भेदभाव रोकने वाले UGC नियमों की फिर होगी समीक्षा! केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- विशेष समिति बनाई जा रही है

Amanat Ansari 05 Nov 2026 06:42 PM 1 Mins
जातिगत भेदभाव रोकने वाले UGC नियमों की फिर होगी समीक्षा! केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- विशेष समिति बनाई जा रही है

जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई थी रोक

छात्रों की चिंताओं को किया जाएगा दूर

नई दिल्ली: उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 2026 के नए नियमों पर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने बताया कि इन नियमों की दोबारा समीक्षा के लिए एक विशेष समिति गठित की जा रही है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ को यह जानकारी दी.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को क्या बताया?

केंद्र का कहना है कि वह छात्रों की चिंताओं को दूर करने और ऐसा ढांचा तैयार करने पर विचार कर रही है, जिसमें किसी भी वर्ग के छात्र को अलग-थलग, असुरक्षित या आशंकित महसूस न हो. सरकार नियमों के उद्देश्य और उनके क्रियान्वयन को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच संतुलन बनाना चाहती है. CJI सूर्यकांत ने जोर दिया कि इस प्रक्रिया में सभी छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और युवा पीढ़ी की चिंताओं को सबसे अधिक महत्व दिया जाना चाहिए.

जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई थी रोक?

सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में UGC के नए इक्विटी नियमों पर पूरी तरह रोक लगा दी थी. अदालत ने नियमों की भाषा को प्रथम दृष्टया अस्पष्ट बताया था, खासकर रेगुलेशन 3(C) को, जिसमें जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा दी गई थी. अदालत ने कहा था कि इसकी भाषा अस्पष्ट है और दुरुपयोग की आशंका है. तब तक 2012 के UGC नियम लागू रखने का निर्देश दिया गया था.

अदालत ने मामले को चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है. CJI ने कहा कि युवा पीढ़ी के कल्याण को केंद्र में रखकर समीक्षा होनी चाहिए. समिति में शिक्षाविदों और प्रतिष्ठित न्यायविदों को शामिल करने का सुझाव पहले भी दिया जा चुका है. फिलहाल 2012 के नियम ही लागू हैं.

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