भोपाल/नई दिल्ली: मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस ने दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को हुई INDIA गठबंधन की रैली में शामिल न होने पर 60 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया है. इनमें 9 जिला अध्यक्ष, 5 उपाध्यक्ष, 14 महासचिव और 32 सचिव शामिल हैं. राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर 3 नवंबर को जारी आदेश के तहत यह निलंबन तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है और अगले आदेश तक जारी रहेगा.
रैली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संबोधन दिया था. इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कथित वोट चोरी के मुद्दे को उठाया गया था. युवा कांग्रेस नेतृत्व ने पदाधिकारियों की गैरमौजूदगी को संगठनात्मक अनुशासनहीनता करार दिया है.
निलंबित नेताओं के अनोखे जवाब
कई नेताओं ने अपनी अनुपस्थिति के पीछे व्यक्तिगत कारण बताए हैं. मैहर जिला अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने कहा, “मेरे बड़े भाई के घर 12 साल बाद बेटा हुआ था. परिवार में इतने लंबे समय बाद बच्चे का जन्म होने पर मैं खुशी के मौके पर मौजूद रहना चाहता था. मैंने प्रदेश अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों को जानकारी दे दी थी और निमंत्रण भी दिया था. बाद में रैली की जानकारी मिली.” उन्होंने अपील करने की बात कही और कहा कि वास्तविक मजबूरियों वाले नेताओं को निलंबित नहीं किया जाना चाहिए था.
महासचिव रोहित राजौरिया ने चाचा के निधन का हवाला दिया. उन्होंने बताया कि उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष और अन्य नेताओं को सूचित कर अनुमति भी मांगी थी. अनूपपुर जिला अध्यक्ष मानवेंद्र मिश्रा और उपाध्यक्ष राजवीर सिंह कुड़िया ने खराब तबीयत का कारण बताया. मिश्रा ने कहा कि उनकी टीम रैली में गई थी, लेकिन व्यक्तिगत रूप से वे बीमार थे.
महासचिव सुमन मौर्य ने बुखार, खांसी और जुकाम का जिक्र किया. मौसम बदलाव से तबीयत खराब होने के कारण वे फोन भी नहीं उठा पाईं. उपाध्यक्ष शिवराज सिंह यादव ने छोटी बहन की शादी का कारण बताया. परिवार में इकलौते भाई होने के नाते तैयारियों में उनकी जिम्मेदारी ज्यादा थी. कुछ नेताओं का आरोप है कि कार्रवाई से पहले उनका पक्ष नहीं सुना गया और कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया गया.
मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस का जवाब
मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रभारी शिवी सिंह चौहान ने कहा कि कार्रवाई उपस्थिति और नेतृत्व के साथ हुए संवाद के आधार पर की गई है. संगठन अनुशासन बनाए रखने पर जोर दे रहा है. यह कार्रवाई सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है. अन्य राज्यों में भी रैली में न पहुंचने पर कई पदाधिकारियों को निलंबित किया गया है. निलंबित नेता अब संगठन के सामने अपना पक्ष रखने और अपील करने की तैयारी में हैं.