लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के धर्मांतरण और यौन शोषण मामले में फोरेंसिक जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. मुख्य आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन उर्फ डॉ. रमीज के मोबाइल फोन, लैपटॉप और हार्ड ड्राइव की जांच में गैर-मुस्लिम (हिंदू) महिला डॉक्टरों की आपत्तिजनक तस्वीरें, वीडियो और स्क्रीन रिकॉर्डिंग मिली हैं. जांच एजेंसियों के अनुसार, इन सामग्रियों का इस्तेमाल कथित तौर पर पीड़ितों को ब्लैकमेल करने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने में किया गया था.
फोरेंसिक रिपोर्ट में क्या मिला?
KGMU कन्वर्जन केस में बड़ा खुलासा! डॉ. रमीज़ के फ़ोन और हार्ड ड्राइव की फोरेंसिक जांच में हिंदू महिला डॉक्टरों की आपत्तिजनक फ़ोटो, वीडियो और स्क्रीन रिकॉर्डिंग मिली हैं। इसका इस्तेमाल कथित तौर पर पीड़ितों को ब्लैकमेल करने और कन्वर्जन के लिए मजबूर करने के लिए किया गया था।
— Panchjanya (@epanchjanya) November 5, 2026
एचपी लैपटॉप से जुड़ी 500 जीबी हार्ड डिस्क में शिकायतकर्ता महिला डॉक्टर और अन्य महिलाओं की आपत्तिजनक तस्वीरें व वीडियो अलग-अलग फोल्डर में सेव पाए गए. एसर लैपटॉप से जुड़ी दूसरी 500 जीबी हार्ड डिस्क में भी इसी तरह की सामग्री मिली. वीवो मोबाइल फोन में महिलाओं की तस्वीरों के साथ सोशल मीडिया चैट की स्क्रीन रिकॉर्डिंग भी बरामद हुई. कुछ रिपोर्ट्स में 500 से अधिक अश्लील वीडियो और कई टीबी डेटा का जिक्र है, जिसमें 12 साल पुराना डेटा भी शामिल है. इनका इस्तेमाल महिलाओं को धमकाने और मतांतरण के लिए मजबूर करने के आरोप हैं.
मामला क्या है?
दिसंबर 2025 में KGMU पैथोलॉजी विभाग की एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने डॉ. रमीज के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. आरोप है कि शादी का झांसा देकर यौन शोषण, जबरन गर्भपात और इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया गया. पीड़िता ने मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर ओवरडोज भी लिया था.
डॉ. रमीज को जनवरी 2026 में गिरफ्तार किया गया था. उनके माता-पिता भी आरोपों में शामिल हैं. STF जांच में कई अन्य प्रोफेसरों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है. पुलिस ने 800 पन्नों से अधिक की चार्जशीट दाखिल की है.