इस्लामाबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के रावलकोट में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के ड्रोन हमले और फायरिंग में कम से कम 7 नागरिक मारे गए और 23 घायल हो गए. इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी और कश्मीरी लोग भड़क उठे हैं. वे अपनी ही सुरक्षा बलों की तुलना इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) से कर रहे हैं और POK को गाजा बता रहे हैं.
रावलकोट में क्या हुआ?
गुरुवार को पाकिस्तानी रेंजर्स, फ्रंटियर कॉर्प्स और पुलिस ने जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रदर्शन स्थलों को खाली कराने के लिए कार्रवाई की. माटियालमेरा बस टर्मिनल और उमर फारूक चौक के पास आवासीय इलाकों और प्रदर्शन शिविरों पर ड्रोन हमले और फायरिंग की गई. JAAC नेता सरदार उमर नजीर ने एक वीडियो में बम के टुकड़े दिखाते हुए दावा किया कि कई दिशाओं से ड्रोन हमले हो रहे हैं.
उन्होंने लोगों से रावलकोट पहुंचने की अपील की. कुछ पाकिस्तानी पत्रकारों का कहना है कि मौतों का आंकड़ा 12 तक पहुंच सकता है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं. सोशल मीडिया पर जलते घरों, रॉकेट हमलों और शवों के साथ प्रदर्शन के वीडियो वायरल हो रहे हैं. एक वीडियो में प्रदर्शनकारी चिल्लाते दिख रहे हैं- “जवाब दो! इस जुल्म का जवाब दो!”
कश्मीरियों का फूट्टा गुस्सा
इस्लामाबाद स्थित कश्मीरी सीमा बाली ने लिखा, ''मैं कश्मीरी हूं, मैं इसकी निंदा नहीं करूंगी. मैं हमेशा पाकिस्तान समर्थक रही. लेकिन पाकिस्तान ने हमें धोखा दिया. खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के बाद अब कश्मीर में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग कर रहा है. पाकिस्तान की सुरक्षा बल IDF जैसी व्यवहार कर रही हैं.'' अबू धाबी स्थित कश्मीरी कार्यकर्ता सोहैब खान (JKLF से जुड़े) ने कहा, ''पाकिस्तानी बलों के ड्रोन हमलों के बाद रावलकोट में जलते घर वही भयावह दृश्य पेश कर रहे हैं जैसे गाजा में... कब्जा करने वाली ताकतें बर्बर होती हैं, चाहे फिलिस्तीन हो या POK.''
क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन?
JAAC जून से राजनीतिक प्रतिनिधित्व, महंगाई और इस्लामाबाद द्वारा दशकों के भेदभाव के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा है. उनका 38 सूत्रीय चार्टर सस्ती बिजली, सब्सिडी वाला गेहूं, बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और ज्यादा स्वायत्तता की मांग करता है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि POK में पर्याप्त जलविद्युत पैदा होने के बावजूद बिजली के भारी बिल आते हैं.
जून में पाकिस्तान ने JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया था, कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया और संचार प्रतिबंध लगाए. इसके बावजूद विरोध जारी है और रावलकोट प्रतिरोध का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. यह घटना इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि जो लोग लंबे समय से गाजा में इजरायल की कार्रवाई की निंदा करते रहे, वे अब अपनी ही सेना पर वही आरोप लगा रहे हैं.