बेंगलुरु: केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ नेताओं पर ऐसा आरोप लगा कि कर्नाटक हाईकोर्ट के जज भी हैरान रह गए. आरोप था कि भाजपा के लोगों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए. अदालत ने साफ कहा कि भाजपा जैसी पार्टी के सदस्यों द्वारा ऐसा नारा लगाना कल्पना से भी परे है. आखिरकार हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द कर दिया.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, 18 दिसंबर 2022 को भाजपा के कुछ नेताओं ने एक विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था. इस दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाने का आरोप लगा. शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इस नारे को सुनकर वह मानसिक रूप से बहुत परेशान हो गया था और उसने शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की.
याचिकाकर्ताओं का तर्क
इसके बाद मंडा के वेस्ट पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153B और 505(1)(B) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया. आरोपियों ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका दायर की. उन्होंने तर्क दिया कि यह नारा अनजाने में और ‘जुबान फिसलने’ की वजह से लगा था. उनका कहना था कि वे ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ कहना चाहते थे, लेकिन गलती से मुंह से ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ निकल गया. उन्होंने यह भी कहा कि समाज में अशांति फैलाने या किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाने का उनका कोई इरादा नहीं था.
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस वी. श्रीशानंद की अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलील स्वीकार करते हुए मामला खारिज कर दिया. कोर्ट ने टिप्पणी की, ''सबसे पहली बात, भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित प्रदर्शन में इस बात की कल्पना भी नहीं की जा सकती कि वहां मौजूद प्रदर्शनकारी ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाएंगे. ऐसे में याचिकाकर्ता के इस तर्क पर विचार करने की जरूरत है कि गलती से उनके मुंह से ‘मुर्दाबाद’ की जगह ‘जिंदाबाद’ शब्द निकल गया.''
अदालत ने यह भी नोट किया कि कथित घटना के लगभग दो साल बाद केवल एक वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर शिकायत दर्ज की गई थी. इस तरह कर्नाटक हाईकोर्ट ने भाजपा नेताओं के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है.