शाह से बैठक के बाद एनसीपी विलय की चर्चा
सुप्रिया सुले के मंत्री बनने की अटकलें भी तेज
नेतृत्व व उत्तराधिकार को लेकर टूटी थी पार्टी
मुंबई: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी) के अध्यक्ष शरद पवार मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती हैं. गुरुवार को पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल उनसे मिलने पहुंचे. करीब आधे घंटे चली मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. प्रफुल्ल पटेल ने बताया कि पवार साहब की तबीयत अब ठीक है. वे अच्छे मूड में थे और देश-राज्य की राजनीति के बारे में पूछ रहे थे.
डॉक्टरों के मुताबिक एक-दो दिन में जांच पूरी होने के बाद वे घर जा सकते हैं. यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई जब अमित शाह से एनसीपी नेताओं की बैठक, पार्टी में नेतृत्व को लेकर तनाव और सुप्रिया सुले के केंद्रीय मंत्री बनने की अटकलें चल रही हैं. वीडियो में पवार पटेल से कहते सुनाई दिए कि 10 तारीख के बाद हम बैठकर चर्चा करेंगे. पटेल ने जवाब दिया कि वे 10 नवंबर के बाद मुंबई में रहेंगे और चर्चा के लिए तैयार हैं.
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने हाल ही में संकेत दिए थे कि सुप्रिया सुले को कैबिनेट में जगह मिल सकती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पवार से फोन पर बात की थी और कहा था कि सुप्रिया अब तैयार हैं. दोनों गुटों के विलय की अटकलें भी चल रही हैं, लेकिन नेता इन कयासों से इनकार कर रहे हैं. प्रफुल्ल पटेल ने साफ कहा कि अस्पताल में कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई. अब सबकी नजर 10 नवंबर के बाद होने वाली संभावित बैठक पर है.
बता दें कि एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) जुलाई 2023 में टूटी गई थी मुख्य कारण परिवार और सत्ता की राजनीति थे. 2 जुलाई 2023 को शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने अचानक फैसला लिया कि वे 8-9 अन्य विधायकों के साथ महाराष्ट्र की शिंदे-फडणवीस सरकार में शामिल होंगे. उन्हें गठबंधन के बाद डिप्टी सीएम बनाया गया था. इससे पार्टी दो गुटों में बंट गई थी. शरद पवार अपनी बेटी सुप्रिया सुले को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे.
अजित पवार और कई वरिष्ठ नेताओं (प्रफुल्ल पटेल, छगन भुजबल आदि) को लगता था कि उन्हें पर्याप्त मौका नहीं मिल रहा. अजित ने खुलेआम कहा था कि शरद पवार 83 साल के हो गए हैं, अब नई पीढ़ी को मौका देना चाहिए. अजित पवार और उनके समर्थक लंबे समय से भाजपा-शिवसेना सरकार में शामिल होना चाहते थे. वे मानते थे कि विपक्ष में रहने से पार्टी कमजोर हो रही है. शरद पवार महाविकास आघाड़ी के साथ बने रहना चाहते थे.
इससे पहले 2019 में भी अजित पवार एक बार भाजपा के साथ गए थे, लेकिन वापस लौट आए थे. 2023 में यह तनाव चरम पर पहुंच गया. अजित पवार गुट को चुनाव आयोग ने असली एनसीपी माना (नाम और घड़ी चिह्न दिया). शरद पवार गुट को नया नाम मिला एनसीपी (शरदचंद्र पवार) या NCP-SP.