'श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े खड़े होते हैं'... धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ आगरा कोर्ट में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज

Amanat Ansari 06 Nov 2026 11:22 AM 2 Mins
'श्रीकृष्ण तीन जगह से टेढ़े खड़े होते हैं'... धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ आगरा कोर्ट में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज

आगरा: बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ भगवान श्रीकृष्ण पर कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर आगरा की अदालत में आपराधिक मानहानि की शिकायत दर्ज कराई गई है. अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने यह शिकायत सिविल कोर्ट में दाखिल की है.

क्या कहा था धीरेंद्र शास्त्री ने?

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में राम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और भगवान कृष्ण के खड़े होने के तरीके की तुलना की थी. शिकायत के अनुसार उन्होंने कहा था, ''जो लोग कृष्ण को मानते हैं, उन्हें शायद बुरा लगे, लेकिन कृष्ण बहुत टेढ़े हैं. जब वे खड़े भी होते हैं तो तीन जगह से मुड़े हुए होते हैं.'' शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन टिप्पणियों से भगवान कृष्ण के वंशजों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान हुआ है.

शिकायतकर्ता का दावा क्या?

अजय प्रताप सिंह ने अदालत में कहा कि भगवान कृष्ण द्वापर युग में मानव रूप में जन्मे थे और उनके वंशज आज भी भारत में रहते हैं. उन्होंने जादौन, जडेजा और भाटी समुदायों का हवाला दिया. उन्होंने खुद को ननिहाल की तरफ से भगवान कृष्ण का वंशज बताया. सिविल जज कंचन कुमार की अदालत में प्रारंभिक सुनवाई हुई. अदालत ने शिकायत दर्ज कर ली है और अगली सुनवाई 14 दिसंबर को तय की है.

धीरेंद्र शास्त्री के विवादित बयान

  • भगवान राम के ''पांच पिता'': 2026 में उन्होंने कहा कि ''राम जी के पांच बाप थे, इसे स्वीकार करना मुश्किल है पर यही सत्य है.'' यह बात किसी लेख या ग्रंथ में नहीं मिलेगी. साथ में राजा दशरथ की अंत्येष्टि का जिक्र करते हुए कहा कि राम जी उपस्थित नहीं थे. इस पर भी विवाद बढ़ा और अखिलेश यादव ने इसे सनातन-विरोधी बताया.⁠
  • संत तुकाराम की पत्नी पर टिप्पणी: 2023 में एक कथा में उन्होंने कहा कि संत तुकाराम की पत्नी उन्हें रोज डंडे से मारती थीं. महाराष्ट्र में भारी विरोध हुआ. उन्होंने सफाई दी कि यह किसी किताब से पढ़ा था और माफी मांगते हुए शब्द वापस ले लिए.
  • साईं बाबा पर टिप्पणी: उन्होंने कहा कि साईं बाबा संत या फकीर हो सकते हैं, लेकिन भगवान नहीं. उदाहरण देते हुए कहा कि गीदड़ की खाल
  • पहनने से कोई शेर नहीं बन जाता. साईं भक्तों ने विरोध किया. बाद में उन्होंने कहा कि किसी संत को भगवान मानना निजी आस्था है और माफी मांगी.⁠
  • छत्रपति शिवाजी महाराज पर टिप्पणी: 2026 में नागपुर में उन्होंने कहा कि युद्ध से थककर शिवाजी महाराज ने राज्य की जिम्मेदारी छोड़ने का विचार किया और अपना मुकुट समर्थ रामदास को सौंप दिया. इस पर विरोध हुआ तो उन्होंने माफी मांगी और कहा कि बात सम्मान के भाव से कही गई थी.

Recent News