अब एडन शहर के करीब पहुंच गए हैं हूती विद्रोही
अमेरिका, तुर्की, पाकिस्तान मदद के लिए तैयार नहीं
सना: यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के साथ युद्धविराम के बदले में बड़ी मांग रख दी है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, हूतियों ने 51 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 4.3 लाख करोड़ रुपए) और खुद को यमन के शासक के रूप में आधिकारिक मान्यता देने की शर्त रखी है. सऊदी अरब ने हाल ही में लाल सागर में अपने तेल टैंकरों पर हूती हमलों के बाद बातचीत की कोशिश की थी. हूतियों ने जवाब में यह भारी मुआवजा मांगा, जिसे उन्होंने सालों के सऊदी एयरस्ट्राइक और नाकेबंदी से हुए नुकसान का मुआवजा बताया.
क्यों खास है यह मांग?
51 अरब डॉलर सिर्फ पैसा नहीं है. सऊदी अरब के लिए हूतियों को यमन का शासक मानना बड़ा रणनीतिक समझौता होगा. इससे ईरान समर्थित समूह को अपने दक्षिणी पड़ोसी देश में वैध सत्ता मिल जाएगी, जिसे रियाद लंबे समय से रोकने की कोशिश कर रहा है. हूती विद्रोही अब एडन शहर के करीब पहुंच गए हैं, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार का मुख्य आधार है. वे शहर से महज 50 मील दूर हैं. अक्टूबर में उन्होंने सऊदी अरब के हवाई अड्डों और अरामको तेल सुविधाओं पर लगातार हमले किए, जिससे हजारों उड़ानें रद्द हुईं.
सऊदी के पास कम विकल्प
रियाद के पास सीमित विकल्प हैं. सिर्फ हवाई हमलों से हूतियों को नहीं रोका जा सका. जमीनी सेना भेजने से भारी नुकसान और घरेलू दबाव का खतरा है. संयुक्त अरब अमीरात पहले ही यमन अभियान से बाहर हो चुका है, जबकि अमेरिका, तुर्की, पाकिस्तान और मिस्र जैसे सहयोगी फिलहाल बड़े सैन्य समर्थन के लिए तैयार नहीं दिख रहे.
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सऊदी अरब ये मांगें मान लेता है तो यह एक खतरनाक मिसाल बनेगी. हूती बार-बार हमले बढ़ाकर और रियायतें मांग सकते हैं. दूसरी ओर, मना करने से हमले जारी रह सकते हैं, जो सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था और निवेश छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं. अब देखना है कि रियाद इन शर्तों पर कैसे प्रतिक्रिया देता है.