नई दिल्ली: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में समान नागरिक संहिता (UCC) को चुनौती दी है. बोर्ड ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि संहिता के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली पहले दायर याचिकाओं के साथ हाईकोर्ट ने उसकी याचिका स्वीकार कर ली है और मामले को 1 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है.
प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने कहा कि AIMPLB की याचिका में तर्क दिया गया है कि UCC संविधान का उल्लंघन करती है और मुस्लिम पर्सनल लॉ के खिलाफ है. बोर्ड ने कहा कि AIMPLB ने 10 अलग-अलग व्यक्तियों के माध्यम से उत्तराखंड हाईकोर्ट में संहिता को चुनौती देने वाली याचिका दायर की है. ये व्यक्ति प्रभावित पक्ष हैं और उनमें से कुछ AIMPLB से भी जुड़े हुए हैं.
UCC को लेकर उत्तराखंड सरकार ने कहा था कि इस उद्देश्य समाज में समानता लाना है, जहां धर्म, जाति, लिंग या समुदाय के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव समाप्त हो सके. इस कानून के तहत सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और व्यक्तिगत मामलों जैसे विवाह, तलाक, संपत्ति के बंटवारे, गोद लेने आदि के लिए एक समान कानून लागू होगा. यह कदम उत्तराखंड में समाज को एक समान आधार पर जोड़ने का प्रयास किया गया है.
हालांकि गोवा में पहले से ही UCC लागू है, लेकिन वहां इसे पुर्तगाली सिविल कोड के तहत लागू किया गया था. उत्तराखंड स्वतंत्रता के बाद पहला राज्य बन गया, जहां यूसीसी लागू है. वहीं इसके प्रावधानों की बात करें तो राज्य में शादी और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स को भी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके तहत नागरिकों को एक समान कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से संबंधित हों. इस कदम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी के लिए समान नियम और अधिकार हों.