कोर्ट ने POCSO केस रद्द कर लड़की के लिए मैकबुक खरीदने का दिया आदेश, लगे थे ये गंभीर आरोप 

Amanat Ansari 28 Feb 2026 03:31: PM 1 Mins
कोर्ट ने POCSO केस रद्द कर लड़की के लिए मैकबुक खरीदने का दिया आदेश, लगे थे ये गंभीर आरोप 

Bombay High Court verdict: बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे के 52 वर्षीय व्यवसायी के खिलाफ बच्चों का यौन शोषण से संरक्षण (POCSO) अधिनियम के तहत दर्ज केस रद्द कर दिया है, क्योंकि पीड़ित लड़की ने अपनी गवाही में कहा कि शिकायत एक गलतफहमी के कारण दर्ज की गई थी. हालांकि, कोर्ट ने आरोपी पर 1.5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया और एक असामान्य निर्देश में हाई कोर्ट रजिस्ट्री को आदेश दिया कि इस राशि से लड़की के लिए लेटेस्ट वर्जन का मैकबुक या कोई अन्य उपयुक्त लैपटॉप खरीदा जाए.

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जस्टिस अश्विन डी. भोबे ने यह भी निर्देश दिया कि 17 वर्षीय लड़की से उसकी पसंद के बारे में सलाह ली जाए और डिवाइस को उसकी शैक्षणिक जरूरतों के अनुसार चुना जाए ताकि उसकी आगे की पढ़ाई में मदद मिले. यह कानूनी विवाद तब शुरू हुआ जब आरोप लगे कि रिश्ते में लड़की के मामा ने उसके साथ अनुचित व्यवहार किया.

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शुरुआती शिकायत के अनुसार, कथित उत्पीड़न तब हुआ जब वह उसे क्लास 11 की परीक्षा के लिए स्कूल छोड़ने जा रहा था, उसने पूछा कि क्या वह उसका बॉयफ्रेंड बन सकता है और बाद में लगातार मैसेज भेजे. स्थिति अगस्त 2024 में तब बढ़ी जब किराने का सामान खरीदने जाने के दौरान मामा ने कथित तौर पर कहा "आई लव यू", चुंबन मांगा और उसके स्तन को छुआ.

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लड़की ने पहले स्कूल काउंसलर को बताया और बाद में दादी को सूचित किया, जिसके बाद मुंबई में FIR दर्ज हुई. कोर्ट की कार्यवाही के दौरान कहानी बदल गई. आरोपी के वकील शहजाद नकवी ने दलील दी कि FIR एक "गलतफहमी" का नतीजा थी जो अब सुलझ चुकी है. लड़की और उसके माता-पिता ने भी यही बात दोहराई कि वे अब आपराधिक मुकदमा आगे नहीं बढ़ाना चाहते. उन्होंने कहा कि परिवार में सुलह हो चुकी है और मुकदमे को जारी रखना जरूरी नहीं है.

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महाराष्ट्र की ओर से पेश अतिरिक्त लोक अभियोजक पीएन दाभोलकर ने माना कि पीड़िता के रुख को देखते हुए आपराधिक मुकदमा जारी रखने से कोई फायदा नहीं होगा. हालांकि, दाभोलकर ने तर्क दिया कि कार्यवाही दर्ज करने के तरीके को देखते हुए याचिकाकर्ता पर लागत (जुर्माना) लगाया जाना चाहिए. बेंच ने इस बात से सहमति जताई और निर्देश दिया कि 1.5 लाख रुपए में से लैपटॉप खरीदने के बाद बची कोई भी राशि हाई कोर्ट कर्मचारी मेडिकल वेलफेयर फंड में ट्रांसफर की जाए.

Bombay High Court POCSO Act FIR quashed Pune businessman legal settlement

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