हर्दीप पुरी की बेटी को एपस्टीन से जोड़ने वाली पोस्ट्स हटाने का आदेश, क्या था उसमें?

Amanat Ansari 17 Mar 2026 02:01: PM 2 Mins
हर्दीप पुरी की बेटी को एपस्टीन से जोड़ने वाली पोस्ट्स हटाने का आदेश, क्या था उसमें?

नई दिल्ली: एक महत्वपूर्ण अंतरिम राहत में दिल्ली हाई कोर्ट ने हिमायनी पुरी (केंद्रीय मंत्री हर्दीप सिंह पुरी की बेटी) को दोषी ठहराए गए सेक्स अपराधी जेफरी एपस्टीन से जोड़ने वाली ऑनलाइन सामग्री को तुरंत हटाने का आदेश दिया. कोर्ट ने माना कि उनके पक्ष में प्रथम दृष्टया (प्राइमा फेसी) मामला बनता है.

हिमायनी पुरी द्वारा दायर याचिका की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया कि उनके द्वारा चिह्नित सभी आक्षेपित सामग्री (Impugned content) को तुरंत हटा दिया जाए. कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सामग्री तुरंत नहीं हटाई जाती, तो मध्यस्थ प्लेटफॉर्म्स (Intermediary platforms) को 24 घंटे के अंदर इसे हटाना सुनिश्चित करना होगा.

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल भारतीय क्षेत्राधिकार में अपलोड की गई सामग्री पर लागू होगा. ''उन्हें जवाब दाखिल करने दें, फिर हम इस मुद्दे पर विचार करेंगे.'' बेंच ने कहा और मध्यस्थ प्लेटफॉर्म्स सहित प्रतिवादियों को समन जारी किया.

प्रथम दृष्टया मामला और सुविधा का संतुलन

कोर्ट ने पाया कि सुविधा का संतुलन याचिकाकर्ता के पक्ष में है और मामले में गहन विचार की आवश्यकता है. सभी पक्षों को दो सप्ताह के अंदर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया. हिमायनी पुरी की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि ये आरोप एक सुनियोजित हमला का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करना है. 

वकील ने कहा कि झूठे आरोप की असली प्रकृति एक दोषी अपराधी से जुड़ाव है. मेरा उससे कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि मैं कैबिनेट मंत्री की बेटी होने के कारण हमले का शिकार हुई हूं. मुझे राजनीतिक दुर्भावना का संदेह है. वकील ने बताया कि विशिष्ट URL चिह्नित किए गए हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई मांगी जा रही है. “हमने सच्चे तथ्य और सही चित्र प्रस्तुत किया है.

प्रतिष्ठा को नुकसान का मुद्दा

यह तर्क दिया गया कि न्यूयॉर्क की निवासी हिमायनी पुरी को विदेश में काफी प्रतिष्ठागत क्षति हुई है. उन्होंने कहा कि मैं वहां एक वित्तीय न्यासी, बैंकर और निवेशक हूं, इसलिए वैश्विक प्रतिष्ठा की रक्षा करनी है. वकील ने कहा और वैश्विक स्तर पर सामग्री हटाने की मांग की. हालांकि, वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने बताया कि वैश्विक टेकडाउन का मुद्दा वर्तमान में डिवीजन बेंच के समक्ष लंबित है. उन्होंने कहा कि हम केवल भारत के अंदर ही टेकडाउन कर सकते हैं. वैश्विक स्तर पर हम ऐसा नहीं कर सकते.

प्लेटफॉर्म्स ने क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाए

मेटा की ओर से पेश वकील ने पूछा कि क्या भारतीय अदालत वैश्विक टेकडाउन आदेश जारी कर सकती है. उन्होंने कहा कि हम एक वैश्विक कंपनी हैं. यदि वैश्विक आदेश मांगा जाएगा, तो हमें जवाबी हलफनामा दाखिल करना होगा. यह भी तर्क दिया गया कि यह मुकदमा भारत में इसलिए दायर किया गया क्योंकि कथित मानहानिकारक सामग्री यहीं से उत्पन्न हुई है, और वैश्विक प्रवर्तन जटिल क्षेत्राधिकार संबंधी सवाल खड़े करता है.

दूसरी ओर, कुछ पत्रकारों की ओर से पेश वकील ने कहा कि एपस्टीन से संबंधित विश्व स्तर पर जांच चल रही है और पत्रकारिता की स्वतंत्रता की रक्षा होनी चाहिए. तर्क दिया गया कि कुछ वीडियो और पोस्ट केवल सवाल उठा रहे थे और सार्वजनिक रूप से ज्ञात तथ्यों का जिक्र कर रहे थे, जिसमें हर्दीप पुरी के एपस्टीन से मिलने का दावा भी शामिल है.

कोर्ट ने मुद्दा खुला रखा

अंतरिम राहत देते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वैश्विक टेकडाउन का सवाल अभी खुला है और सभी पक्षों के जवाब मिलने के बाद इस पर विचार किया जाएगा. बेंच ने कहा कि फिलहाल, यह केवल भारत में मौजूद सामग्री के लिए होगा और संकेत दिया कि सभी पक्षों को सुनने के बाद व्यापक फैसला आ सकता है.

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