विधानसभा चुनावों को लेकर मायावती का बड़ा दांव, भतीजे आकाश के ससुर और वरिष्ठ नेता नौशाद को दी बड़ी जिम्मेदारी

Amanat Ansari 17 Feb 2026 12:27: PM 1 Mins
विधानसभा चुनावों को लेकर मायावती का बड़ा दांव, भतीजे आकाश के ससुर और वरिष्ठ नेता नौशाद को दी बड़ी जिम्मेदारी

UP Assembly Elections: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती (Mayawati) ने आगामी 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी के संगठन में महत्वपूर्ण फेरबदल किए हैं. इन बदलावों का मुख्य मकसद राज्य में पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत करना और राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी मौजूदगी बढ़ाना है. मायावती ने कई विश्वसनीय नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं, ताकि कार्यकर्ता अधिक सक्रिय हो सकें और संगठन बेहतर ढंग से काम कर सके.

UP के अहम क्षेत्रों पर फोकस

पूर्व मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता नौशाद अली को अब कानपुर, लखनऊ, आगरा और मेरठ जैसे चार प्रमुख मंडलों का मुख्य प्रभारी बनाया गया है. ये इलाके राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील हैं, जहां बसपा अपनी पुरानी ताकत को पुनर्जीवित करने और नई रणनीतियों से विस्तार करने की कोशिश में जुटी है. नौशाद अली को इन मंडलों में संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ाने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का महत्वपूर्ण दायित्व मिला है.

राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी

मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर, पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ को भी बड़ी भूमिका सौंपी है. उन्हें केरल, गुजरात, छत्तीसगढ़ और दिल्ली इन चार राज्यों का मुख्य केंद्रीय प्रभारी नियुक्त किया गया है. अशोक सिद्धार्थ ने हाल ही में पार्टी में वापसी की है और अब इन राज्यों में बसपा की रणनीति तैयार करने, संगठन विस्तार करने तथा नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने का काम संभालेंगे. यह कदम पार्टी को उत्तर प्रदेश से बाहर भी मजबूत बनाने की दिशा में देखा जा रहा है.

अन्य प्रमुख नियुक्तियां...

  • संगठन में और बदलावों के तहत पूर्व सांसद गिरीश चंद को उत्तराखंड का प्रभारी बनाया गया है.
  • राजाराम को मध्य प्रदेश की जिम्मेदारी मिली है, जबकि सुमरत सिंह अब राजस्थान संभालेंगे. ये सभी फैसले बसपा की
  • चुनावी तैयारियों को तेज करने और विभिन्न राज्यों में अपनी स्थिति सुधारने के उद्देश्य से लिए गए हैं.

कुल मिलाकर, मायावती की यह रणनीति पार्टी को 2027 के बड़े मुकाबले के लिए तैयार करने की कोशिश है, जिसमें जमीनी स्तर पर मजबूती और राष्ट्रीय विस्तार दोनों पर जोर दिया जा रहा है. हालांकि भाजपा और सपा के सामने बसपा के लिए आसान नहीं होगा, क्योंकि मुस्लिम मतदाता समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में चले गए हैं और दलितों का बड़ा हिस्सा चंद्रशेखर आजाद की पार्टी आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) और भाजपा पर भरोसा जता रहे हैं.

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