मनरेगा मजदूरी करती हैं मां, बेटे ने देश का नाम किया रौशन, 17 साल के तोफीक को सरकार ने 11 लाख से नवाजा

Amanat Ansari 18 Feb 2026 12:25: AM 2 Mins
मनरेगा मजदूरी करती हैं मां, बेटे ने देश का नाम किया रौशन, 17 साल के तोफीक को सरकार ने 11 लाख से नवाजा

जयपुर: अजमेर के एक छोटे से राजस्थानी गांव रसूलपुरा में जन्मा तोफीक अहमद, जहां कच्ची गलियां और सीमित संसाधन ही जीवन का हिस्सा थे. उसके पिता सिराज मोहम्मद गांव में छोटी-सी किराने की दुकान चलाते हैं, जबकि मां अनीसा परवीन मनरेगा योजना के तहत दिहाड़ी मजदूरी करती हैं. ऐसे माहौल में बड़ा हुआ तोफीक कभी सोच भी नहीं सकता था कि एक दिन वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करेगा.

मात्र 17 साल की उम्र में तोफीक ने साबित कर दिया कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए अमीरी या बड़े शहर की जरूरत नहीं, बस जुनून और मेहनत काफी है. कक्षा 8वीं में केन्द्रीय विद्यालय वन में पढ़ते हुए उसकी खेल प्रतिभा को उसके शारीरिक शिक्षक और कोच मनोज कुमार बैरवा ने पहचाना. शुरू में मुक्केबाजी की ट्रेनिंग दी गई, लेकिन दादी के चोट लगने के डर से कोच ने उसे रनिंग और गोला फेंक (शॉट पुट) की ओर मोड़ा. कोच की लगन और तोफीक की कड़ी मेहनत ने कमाल कर दिया.

नेपाल से जीत लाया स्वर्ण पदक

जून 2024 में नेपाल के पोखरा रंगशाला स्टेडियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में गोला फेंक में स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम ऊंचा किया. जुलाई 2025 में आगरा में 54वीं केन्द्रीय विद्यालय संगठन राष्ट्रीय खेलकूद में मुक्केबाजी (अंडर-17) में रजत पदक. केन्द्रीय विद्यालय की रीजनल प्रतियोगिता में 400 मीटर दौड़ और गोला फेंक में रजत पदक हासिल किया. 2025-26 में झांसी में राष्ट्रीय मुक्केबाजी प्रतियोगिता में फिर रजत पदक पर कब्जा. 2023 में अजमेर जिला ओपन में गोला फेंक में स्वर्ण और कोटा में अंडर-14 ओपन में 60 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक.

उसके ताऊजी मोहम्मद इकबाल खान खुद कबड्डी के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं, जिनकी प्रेरणा ने तोफीक को और मजबूती दी. इस सफलता के बाद सरकार ने 'निर्माण श्रमिक अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता प्रोत्साहन योजना' के तहत तोफीक को 11 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की. इस योजना में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतने पर 11 लाख, रजत पर 8 लाख और कांस्य पर 5 लाख रुपे मिलते हैं. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय भागीदारी के लिए 2 लाख की सहायता भी दी जाती है.

तोफीक की कहानी हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो सोचता है कि गरीबी सपनों की राह रोक लेती है. उसने दिखाया कि अगर इरादे पक्के हों, मेहनत लगातार हो और कोई सच्चा मार्गदर्शक साथ हो, तो कच्ची गलियों से अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक का सफर तय किया जा सकता है.

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