मध्य प्रदेश : उज्जैन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने युवाओं के बीच ऐसा संदेश दिया, जिसकी चर्चा अब तेज हो गई है. 18 सितंबर को उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद-2026 में भागवत ने इंसान के अहंकार, प्रकृति के नियम और धर्म की भूमिका पर विस्तार से बात की। इस तीन दिवसीय आयोजन में देश के 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 1600 से अधिक युवा प्रतिनिधियों के पहुंचने की जानकारी सामने आई है.
भागवत ने कहा कि इंसान को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि दुनिया उसकी इच्छा के मुताबिक चलती है. उन्होंने इसी संदर्भ में कहा कि उदय हुआ है तो अस्त भी होगा. उनके मुताबिक प्रकृति अपने शाश्वत नियमों के अनुसार चलती है और किसी व्यक्ति के अहंकार या इच्छा से उसके नियम नहीं बदलते. उन्होंने सूर्य का उदाहरण देते हुए कहा कि कोई व्यक्ति उसके अस्तित्व में विश्वास करे या न करे, लेकिन उसका उगना और डूबना तय है.
RSS प्रमुख ने युवाओं के बीच धर्म को लेकर बनी धारणा पर भी बात की. उन्होंने कहा कि अक्सर धर्म को बुढ़ापे से जोड़ दिया जाता है और गीता-रामायण को रिटायरमेंट के बाद पढ़ने वाली किताबें समझ लिया जाता है, जबकि धर्म जीवन की शुरुआत से अंत तक बना रहने वाला अनुशासन है.
भागवत ने ‘धर्म’ और पश्चिमी अर्थ वाले ‘रिलीजन’ में अंतर बताते हुए कहा कि भारतीय संदर्भ में धर्म केवल पूजा-पद्धति या मजहब तक सीमित नहीं है. उनके अनुसार धर्म व्यक्ति, समाज और जीवन को जिम्मेदारी तथा अनुशासन से जोड़ने वाली व्यापक अवधारणा है.
उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि धर्म को समझना आसान नहीं है, इसके लिए निरंतर चिंतन, खोज और आत्ममंथन जरूरी है. उनका जोर इस बात पर रहा कि इंसान को अहंकार छोड़कर जीवन और प्रकृति के शाश्वत नियमों को समझने की कोशिश करनी चाहिए.