नई दिल्ली : यमन में हूती लड़ाकों के हमले तेज होने के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब के साथ बड़ा रक्षा सौदा आगे बढ़ा दिया है. अमेरिकी विदेश विभाग ने सऊदी अरब को 48 अत्याधुनिक F-35 फाइटर जेट बेचने के संभावित सौदे को मंजूरी दे दी है. इस पूरे पैकेज की अनुमानित कीमत करीब 24.3 अरब डॉलर यानी लगभग 2 लाख करोड़ रुपये है. हालांकि, डील को अंतिम रूप देने से पहले अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है.
इस सौदे में सिर्फ F-35 विमान ही नहीं, बल्कि 49 संबंधित इंजन, कम्युनिकेशन सिस्टम, स्पेयर पार्ट्स और दूसरे सपोर्ट उपकरण भी शामिल हैं. F-35 को दुनिया के सबसे उन्नत स्टील्थ लड़ाकू विमानों में गिना जाता है. इसकी तकनीक दुश्मन के रडार से बचने और आधुनिक सेंसर सिस्टम के जरिए लंबी दूरी पर लक्ष्य पहचानने के लिए डिजाइन की गई है.
सवाल इसलिए बड़ा है क्योंकि यह ऐलान ऐसे वक्त हुआ है जब सऊदी अरब पर हूतियों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं. हालिया दिनों में हूतियों ने सऊदी शहरों और सैन्य ठिकानों की तरफ ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा किया है. यान्बू के तेल बंदरगाह और खमीस मुशैत एयरबेस को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। सऊदी अरब ने जवाब में यमन में हवाई हमले तेज किए हैं.
यानी एक तरफ हूती हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा चुनौती बढ़ाई, दूसरी तरफ वॉशिंगटन ने अरबों डॉलर का हथियार पैकेज आगे बढ़ा दिया, इससे अमेरिका-सऊदी सैन्य साझेदारी और गहरी होने के संकेत मिल रहे हैं. सितंबर की शुरुआत में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने हूतियों के खिलाफ अमेरिकी मदद मांगी थी. उस समय अमेरिका ने सीधे सैन्य हस्तक्षेप से इनकार करते हुए खुफिया जानकारी और टारगेटिंग में मदद की बात कही थी.
अमेरिका का कहना है कि F-35 सौदा क्षेत्र में सैन्य संतुलन नहीं बदलेगा, लेकिन डील को लेकर इजरायल की सैन्य बढ़त और सऊदी-अमेरिका संबंधों पर बहस तेज हो सकती है.