इस्लामाबाद/वाशिंगटन: पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ फील्ड मार्शल असीम मुनीर और अमेरिकी ड्रोन निर्माता कंपनी POWERUS के बीच एक नए रक्षा समझौते ने चर्चा छेड़ दी है. बुधवार को POWERUS के सह-संस्थापक रॉबर्ट ब्रेट वेलिकोविच के नेतृत्व में कंपनी के प्रतिनिधिमंडल ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में असीम मुनीर से मुलाकात की.
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, POWERUS ने पाकिस्तान आर्मी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) साइन किया है. इसमें अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) यानी बिना पायलट वाले ड्रोन सिस्टम का एक शुरुआती ऑर्डर भी शामिल है. हालांकि, इस ऑर्डर की कीमत और ड्रोन की पूरी तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है. कंपनी ने सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए विवरण देने से इनकार कर दिया.
पाकिस्तान सेना के आधिकारिक बयान में सिर्फ इतना कहा गया कि दोनों पक्षों ने उभरती रक्षा तकनीक, सैन्य खरीद, उत्पादन और लंबी अवधि में क्षमता निर्माण पर चर्चा की. असीम मुनीर ने बैठक में एडवांस टेक्नोलॉजी और राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया.
ईरान सीमा पर इस्तेमाल की अटकलें
इस डील के बाद अटकलें तेज हो गई हैं कि इन हाई-टेक ड्रोन या काउंटर-ड्रोन सिस्टम का इस्तेमाल पाकिस्तान की ईरान से लगी लगभग 909 किलोमीटर लंबी सीमा (खासकर बलूचिस्तान क्षेत्र) पर निगरानी के लिए किया जा सकता है. यह इलाका सीमा पार आतंकवाद और तस्करी के लिए संवेदनशील माना जाता है. हालांकि, न तो पाकिस्तान सेना और न ही POWERUS ने सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि की है.
मध्य पूर्व डील और चीन फैक्टर
POWERUS ने इससे पहले मध्य पूर्व में तेल-गैस इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए 22.3 मिलियन डॉलर का काउंटर-UAS समझौता किया था. कंपनी अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संयुक्त ड्रोन तकनीक विकसित करने और पाकिस्तान में संभावित उत्पादन की संभावना भी तलाश रही है.
यह डील इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान की सैन्य आपूर्ति में चीन की बड़ी भूमिका है. अमेरिकी कंपनी के साथ सहयोग पाकिस्तान को तकनीक का एक नया स्रोत दे सकता है, लेकिन पारदर्शिता और नियंत्रण को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. यह घटनाक्रम अमेरिका-पाकिस्तान रक्षा सहयोग के नए अध्याय की ओर इशारा करता है. आगे देखना होगा कि इस सीक्रेट डील का क्षेत्रीय सुरक्षा पर क्या असर पड़ता है.