नई दिल्ली : अफगानिस्तान में मानवीय संकट और आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत लगातार मदद का हाथ बढ़ा रहा है. संयुक्त राष्ट्र में भारत ने अपनी सहायता और सहयोग का ब्यौरा देते हुए बताया कि अगस्त 2021 से अब तक अफगानिस्तान को बड़ी मात्रा में खाद्यान्न, दवाइयां और कृषि से जुड़ी सामग्री उपलब्ध कराई गई है. भारत ने जोर दिया कि उसकी कोशिश केवल तत्काल राहत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि अफगानिस्तान को लंबे समय में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी सहयोग करना है.
भारत के मुताबिक, अगस्त 2021 के बाद से अफगानिस्तान को 50 हजार टन से ज्यादा गेहूं भेजा गया है. इसके अलावा 450 टन से अधिक दवाइयां और वैक्सीन तथा करीब 40 हजार लीटर कीटनाशक भी उपलब्ध कराया गया. इन सहायता सामग्रियों का उद्देश्य खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि क्षेत्र को सहारा देना है.
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में 500 से ज्यादा विकास परियोजनाओं का भी उल्लेख किया. इन परियोजनाओं के जरिए स्थानीय स्तर पर विकास और लोगों की जरूरतों को पूरा करने पर जोर दिया गया है. भारत ने अफगानी उत्पादों को भारतीय बाजार तक पहुंच देने के लिए बिना टैरिफ वाली सुविधा और दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने वाले एयर फ्रेट कॉरिडोर का भी जिक्र किया.
सहयोग का दायरा स्वास्थ्य और कृषि तक सीमित नहीं है. भारत ने शिक्षा, व्यापार, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि और नशीली दवाओं की तस्करी रोकने जैसे क्षेत्रों में भी अफगानिस्तान के साथ सहयोग बढ़ाने की बात कही है. भारत ने अफगान नागरिकों की वापसी के मुद्दे पर भी अपना रुख स्पष्ट किया.
उसने कहा कि अफगान नागरिकों की वापसी उनकी इच्छा के अनुरूप, सुरक्षित और सम्मानजनक तरीके से होनी चाहिए. कुल मिलाकर, भारत का जोर राहत सामग्री पहुंचाने के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, व्यापार, शिक्षा और स्थानीय विकास को मजबूत करने पर है, ताकि अफगान समाज और अर्थव्यवस्था को स्थिरता की दिशा में आगे बढ़ने में मदद मिल सके.