बीजिंग: चीनी नौसेना अपनी समुद्री ताकत को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए एक बेहद आधुनिक और अनोखा युद्धपोत बना रही है. सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि शंघाई के हुडोंग-झोंगहुआ शिपयार्ड में एक विशाल ‘मदरशिप’ (मुख्य जहाज) का निर्माण जोर-शोर से चल रहा है. यह दुनिया का पहला ऐसा जहाज है, जो बिना चालक वाली बड़ी ड्रोन सबमरीन को अपने साथ समुद्र में ले जाकर वहां से तैनात करने में सक्षम होगा.
तस्वीरों से हुआ बड़ा खुलासा
अमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस कंपनी वैंटोर की सैटेलाइट तस्वीरों के मुताबिक, यह जहाज एक साथ चार विशाल स्वचालित सबमरीन (XXLUUV) को ले जा सकता है. द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, इस जहाज में एक अंदरूनी हैंगर और 12 वर्टिकल लिफ्टिंग आर्म्स दिए गए हैं. इसके आकार और बनावट से साफ है कि इसे खास तौर पर नौसैनिक युद्ध अभियानों के लिए तैयार किया जा रहा है.
हजारों मील दूर हमला करने की क्षमता
चीन द्वारा विकसित की जा रही ये ड्रोन सबमरीन आकार में बेहद विशाल हैं. इनमें सबसे बड़ी सबमरीन करीब 148 फीट लंबी है, जो अमेरिकी नौसेना की ओर्का ड्रोन सबमरीन से लगभग तीन गुना और ब्रिटेन के एक्सकैलिबर से चार गुना बड़ी है. बिना किसी चालक दल वाले ये ड्रोन हजारों मील की दूरी तय करके दुश्मनों पर गुप्त रूप से भारी टॉरपीडो और अन्य हथियार दागने की क्षमता रखते हैं.
नौसैनिक शक्ति का बढ़ता दबदबा
माना जाता है कि चीन की जहाज निर्माण क्षमता अमेरिका से कहीं ज्यादा है. फिलहाल अमेरिका के पास 295 युद्धपोत हैं, जबकि चीन के पास इनकी संख्या 400 के पार पहुंच चुकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इस तरह के उन्नत जहाजों का इस्तेमाल ताइवान और दक्षिण चीन सागर जैसे विवादित क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कर सकता है. चीन ताइवान पर अपना नियंत्रण दावा करता है और दक्षिण चीन सागर में भी पड़ोसी देशों के विरोध के बावजूद अपना दबदबा बढ़ा रहा है.
बीजिंग में आयोजित शियांगशान फोरम में चीन के रक्षा मंत्री डोंग जून ने अन्य देशों को चेतावनी देते हुए सैन्यवाद और वर्चस्ववाद से दूर रहने की बात कही. जानकारों के अनुसार, यह इशारा जापान और अमेरिका जैसे देशों के लिए था, जो इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती समुद्री ताकत का मुकाबला करने की कोशिश कर रहे हैं. यह विकास चीन की समुद्री शक्ति में एक नया अध्याय जोड़ने वाला है, जिस पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं.