नई दिल्ली : रूस के कुर्स्क न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी IAEA के मुताबिक, गुरुवार सुबह प्लांट की एक रिएक्टर यूनिट के कूलिंग टावर को ड्रोन ने निशाना बनाया. घटना के वक्त संबंधित रिएक्टर यूनिट संचालन में थी, लेकिन हमले के बावजूद उसके ऑपरेटिंग मोड में कोई बदलाव नहीं हुआ. IAEA के अनुसार, हमले के बाद कूलिंग टावर में आग भी नहीं लगी.
यह घटना रूस के कुर्स्क क्षेत्र में स्थित कुर्स्क न्यूक्लियर पावर प्लांट में हुई है. प्लांट यूक्रेन की सीमा के करीब स्थित होने के कारण रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान इसकी सुरक्षा को लेकर पहले भी अंतरराष्ट्रीय चिंता सामने आती रही है. परमाणु प्रतिष्ठानों के आसपास ड्रोन गतिविधियां खास तौर पर संवेदनशील मानी जाती हैं, क्योंकि किसी बड़े हमले की स्थिति में सुरक्षा और संचालन पर गंभीर असर पड़ सकता है.
IAEA को दी गई जानकारी के मुताबिक, ड्रोन ने रिएक्टर यूनिट के कूलिंग टावर को टक्कर मारी. हालांकि इस घटना में फिलहाल किसी परमाणु आपात स्थिति या रेडिएशन लीक की जानकारी सामने नहीं आई है. रिएक्टर का संचालन जारी रहा और घटना के बाद उसके ऑपरेटिंग मोड में बदलाव नहीं किया गया.
IAEA लंबे समय से युद्ध क्षेत्रों में परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा को लेकर चेतावनी देता रहा है. एजेंसी का मुख्य जोर इस बात पर रहा है कि परमाणु सुविधाओं को सैन्य गतिविधियों से सुरक्षित रखा जाए, क्योंकि किसी बड़े नुकसान की स्थिति का असर केवल संबंधित देश तक सीमित नहीं रह सकता.
फिलहाल सामने आई जानकारी के आधार पर यह हमला कूलिंग टावर तक सीमित रहा और तत्काल किसी बड़े परमाणु सुरक्षा संकट की पुष्टि नहीं हुई है. हालांकि, परमाणु संयंत्र पर ड्रोन हमला युद्ध के बीच न्यूक्लियर साइट्स की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है.