श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की धमकियों का तीखा जवाब दिया है. शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर भारत पर निशाना साधते हुए पानी को रेड लाइन बताया था, तो उमर अब्दुल्ला ने साफ कह दिया कि पाकिस्तान पर कोई रहम नहीं किया जाना चाहिए और यह समझौता रद्द ही रहना चाहिए.
इस्लामाबाद में यादगार-ए-फतह के उद्घाटन समारोह के दौरान शहबाज शरीफ ने आरोप लगाया कि भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को एकतरफा स्थगित करके शांति का माहौल बिगाड़ा है. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान शांति चाहता है, लेकिन हमारी इच्छा को कमजोरी न समझा जाए. पानी की एक-एक बूंद हमारी रेड लाइन है. अगर जल आपूर्ति पर आंच आई तो पाकिस्तान सीधा और माकूल जवाब देगा.
उमर अब्दुल्ला का पलटवार
इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि पाकिस्तान हमेशा कश्मीरी जनता का शुभचिंतक होने का ढोंग करता है, लेकिन पानी के अधिकार की बात आने पर उसकी हमदर्दी गायब हो जाती है. उन्होंने याद दिलाया कि 1960 के समझौते के तहत भारत ने रावी, ब्यास और सतलुज का पानी अपने पास रखा, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब पाकिस्तान को सौंप दी गईं.
अब्दुल्ला ने कहा कि इस समझौते के कारण जम्मू-कश्मीर को दशकों तक भारी नुकसान उठाना पड़ा. चिनाब नदी से पीने का पानी तक नहीं निकाल सके, तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट अटका रहा और सिंचाई व बिजली उत्पादन के लिए बड़े बांध बनाने पर कड़े प्रतिबंध झेलने पड़े.
भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि ये नदियां हमारा खून हैं, जो दशकों से बह रहा है. अब जब भारत ने समझौते को स्थगित कर दिया है, तो इसे आगे भी रद्द ही रखा जाना चाहिए, ताकि जम्मू-कश्मीर अपने जल संसाधनों का पूरा लाभ उठा सके.
अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सीमा पार आतंकवाद के विरोध में 23 अप्रैल 2025 को सिंधु जल समझौते को स्थगित करने की घोषणा की थी. विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुए इस समझौते के तहत छह नदियों का बंटवारा किया गया था, जिसमें पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) का अधिकांश पानी पाकिस्तान को मिला था.