असुंसियन: दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे में एक बड़े डिजिटल बैंक के ढहने से गंभीर वित्तीय और राजनीतिक संकट पैदा हो गया है. यूएनो बैंक (Ueno Bank) के ध्वस्त होने से देश की लगभग आधी आबादी अपनी बचत तक पहुंचने में असमर्थ हो गई है. इसी संकट के चलते राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को महाभियोग के जरिए पद से हटा दिया गया और उन्हें हाउस अरेस्ट में डाल दिया गया है. उपराष्ट्रपति पेड्रो एलियाना को नया राष्ट्रपति शपथ दिलाई गई है.
बैंक का पतन और प्रभाव?
यूएनो बैंक ग्रुपो वाजक्वेज बिजनेस समूह के नियंत्रण वाला डिजिटल बैंक था. 3 नवंबर को पराग्वे के सेंट्रल बैंक ने बैंक की खराब वित्तीय स्थिति देखकर इसे अपने नियंत्रण में ले लिया. बैंक के करीब 30 लाख ग्राहक थे और यह लगभग 85 करोड़ डॉलर के सार्वजनिक फंड का प्रबंधन कर रहा था, जिसमें पेंशन और स्वास्थ्य फंड का पैसा भी शामिल था.
सेंट्रल बैंक ने पाया कि बैंक की पूंजी न्यूनतम कानूनी जरूरत से आधी से भी कम हो गई थी. बैंक ने अपने मालिकों से जुड़ी कंपनियों को नियमों का उल्लंघन करते हुए बड़े कर्ज दिए थे. हस्तक्षेप के बाद लाखों ग्राहकों के खाते फ्रीज हो गए और वे पैसे निकालने या भुगतान करने में असमर्थ हो गए. लगभग 32,000 पेंशनभोगी भी प्रभावित हुए.
राष्ट्रपति सैंटियागो पेना का संबंध
राष्ट्रपति सैंटियागो पेना पूर्व आईएमएफ अर्थशास्त्री हैं और अगस्त 2023 में राष्ट्रपति बने थे. उन पर आरोप है कि उन्होंने ग्रुपो वाज़क्वेज़ में हिस्सेदारी रखी थी और अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल बैंक के विस्तार में किया. पेना का कहना है कि उन्होंने मार्च 2025 में अपनी हिस्सेदारी बेच दी थी और बैंक में सीधा निवेश नहीं किया. पूर्व सेंट्रल बैंक प्रमुख कार्लोस कार्वालो भी पहले फाइनेंसिएरा यूएनो के प्रमुख रह चुके थे. उन पर भी आरोप लगे हैं.
राजनीतिक संकट और महाभियोग
बैंक के ध्वस्त होने के बाद राजधानी असुंसियन में बड़े प्रदर्शन हुए. विपक्षी और पेना की अपनी कोलोराडो पार्टी के कुछ सांसदों ने महाभियोग का प्रस्ताव लाया. 5 नवंबर को पेना ने इस्तीफा देने की घोषणा की, लेकिन संसद ने इसे स्वीकार नहीं किया. 6 नवंबर को सीनेट ने सर्वसम्मति से पेना पर महाभियोग लगाकर उन्हें पद से हटा दिया. उन्हें हाउस अरेस्ट में डाल दिया गया.
अभियोजन पक्ष प्रभाव का दुरुपयोग, विश्वासघात और सार्वजनिक पद के व्यक्तिगत लाभ के आरोपों की जांच कर रहा है. पेना ने गलत काम करने से इनकार किया है. 27 बैंक अधिकारियों और सहयोगियों पर भी आरोप लगे हैं. कई को गिरफ्तार किया गया है. सरकार ने जमाकर्ताओं को उनके पैसे लौटाने के लिए गारंटी फंड की व्यवस्था की है.