नई दिल्ली : स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए बड़ा ऐलान किया है. पीएम मोदी ने कहा कि सरकार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए युवाओं को फ्री ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराने की दिशा में काम करेगी. उनका कहना था कि महंगी कोचिंग गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर बड़ा आर्थिक बोझ बन चुकी है.
पीएम मोदी के इस ऐलान के बाद शिक्षा के क्षेत्र में एक नई बहस शुरू हो गई है. एक तरफ छात्रों और अभिभावकों को महंगी फीस से राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ निजी कोचिंग कारोबार से जुड़े लोगों के सामने भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं.
दरअसल, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाला कोचिंग सेक्टर देश में बड़ा कारोबार बन चुका है. लाखों छात्र UPSC, SSC, बैंकिंग, रेलवे, मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी परीक्षाओं के लिए निजी संस्थानों का सहारा लेते हैं. ऐसे में अगर सरकार गुणवत्तापूर्ण कंटेंट, अनुभवी शिक्षकों, टेस्ट सीरीज, डाउट सॉल्विंग और मेंटरशिप जैसी सुविधाएं बड़े स्तर पर मुफ्त उपलब्ध कराती है, तो निजी कोचिंग संस्थानों को फीस और छात्रों की संख्या के मामले में दबाव का सामना करना पड़ सकता है.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी निजी कोचिंग सेंटर तुरंत बंद हो जाएंगे. सरकारी ऑनलाइन व्यवस्था की पहुंच बढ़ने के बावजूद छात्रों का एक वर्ग आज भी ऑफलाइन क्लास, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और नियमित निगरानी को प्राथमिकता देता है.
सरकार पहले से PM e-VIDYA, SWAYAM और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन शिक्षा जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म चला रही है. यानी पीएम मोदी का ऐलान छात्रों के लिए राहत और महंगे कोचिंग मॉडल के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है. आने वाले समय में असली मुकाबला सिर्फ फीस का नहीं, बल्कि कंटेंट, रिजल्ट और भरोसे का होगा.