बंगाल : पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में शुक्रवार को अचानक बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किए जाने के कुछ ही घंटे बाद बंगाल पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. मिलन प्रधान की गिरफ्तारी एक पुराने हत्या के मामले में हुई है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह मामला नंदीग्राम के भूमि अधिग्रहण आंदोलन के दौर का बताया जा रहा है और उनके खिलाफ वारंट भी जारी होने की बात सामने आई है.
दरअसल, नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर पहले ही राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहे थे. ममता बनर्जी के खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया. इसके बाद ममता बनर्जी ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी नंदीग्राम में अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगी और कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन देगी. ममता के इस ऐलान के कुछ ही समय बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की खबर सामने आ गई.
बताया जा रहा है कि शुक्रवार को मिलन प्रधान नंदीग्राम के रेयापाड़ा इलाके में घर-घर जाकर चुनाव प्रचार कर रहे थे. इसी दौरान पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और बाद में गिरफ्तार कर लिया. रिपोर्टों के अनुसार मामला करीब 19 साल पुराने हत्या प्रकरण से जुड़ा है.
गिरफ्तारी की टाइमिंग को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी उम्मीदवार को चुनाव से पहले निशाना बनाया जा रहा है. वहीं, बीजेपी की ओर से इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा गया है कि पुलिस अपना काम कर रही है और गिरफ्तारी का राजनीति से कोई संबंध नहीं है.
नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है. ऐसे में मतदान से पहले उम्मीदवार की गिरफ्तारी ने बंगाल की सियासत में नई बहस छेड़ दी है.