मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले आजाद समाज पार्टी (आसपा) को बड़ा झटका लगने वाला है. पूर्व सांसद अमीर आलम खान और उनके बेटे पूर्व विधायक नवाजिश आलम खान ने आसपा छोड़ने का ऐलान कर दिया है. दोनों 23 सितंबर को नई दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करेंगे.
पिता-पुत्र ने शुक्रवार को आसपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. नवाजिश आलम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि पार्टी में उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिल रहा था. अमीर आलम ने भी आसपा नेतृत्व पर वादे पूरे न करने और संपर्क में कमी के आरोप लगाए हैं. अमीर आलम और नवाजिश आलम करीब डेढ़ साल पहले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) छोड़कर आसपा में शामिल हुए थे.
2 फरवरी 2025 को शामली के गढ़ीपुख्ता में आयोजित कार्यक्रम में आसपा प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ली थी. अब महज डेढ़ साल बाद ही दोनों ने आसपा से किनारा कर लिया. आसपा की ओर से अलगाव की वजह टिकट और विधानसभा सीटों को लेकर मतभेद बताई जा रही है. पार्टी के थानाभवन प्रभारी मौसम अली राव का दावा है कि पहले बुढ़ाना और मुजफ्फरनगर सीट को लेकर बात हुई थी, बाद में नवाजिश ने थानाभवन सीट की दावेदारी की, जिस पर सहमति नहीं बन सकी. अमीर आलम ने इस दावे को खारिज किया है.
अमीर आलम खान का राजनीतिक सफर करीब चार दशक पहले लोकदल से शुरू हुआ. 1985 में थानाभवन से पहली बार विधायक बने. बाद में मोरना और थानाभवन से भी विधायक रहे तथा उत्तर प्रदेश सरकार में परिवहन मंत्री बने. कैराना से सांसद चुने गए और समाजवादी पार्टी से राज्यसभा सदस्य भी रहे.
नवाजिश आलम खान ने 2012 में सपा के टिकट पर बुढ़ाना सीट से चुनाव जीता. 2017 में बसपा के टिकट पर मीरापुर से चुनाव हारे. 2018 में दोनों रालोद में शामिल हुए और करीब आठ साल जुड़े रहे. इस दौरान कई चुनावों में टिकट की दावेदारी की, लेकिन टिकट नहीं मिला. यह फैसला पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है और चंद्रशेखर आजाद के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.