मुंबई: हिंदी सिनेमा के उस स्वर्णिम दौर का एक चमकदार अध्याय आज हमेशा के लिए बंद हो गया. 89 वर्षीय दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र, जिन्हें दुनिया प्यार से 'ही-मैन' कहकर पुकारती थी, सोमवार सुबह अपने जुहू स्थित आवास पर अंतिम सांस ले चुके हैं. यह दुखद क्षण उनके 90वें जन्मदिन से महज 14 दिन पहले आया, जब पूरा परिवार उनके विशेष दिन की तैयारियों में जुटा हुआ था. IANS की पुष्टि के अनुसार, लंबे समय से चल रही स्वास्थ्य जटिलताओं के बीच उनका निधन हुआ, जो पूरे बॉलीवुड और करोड़ों प्रशंसकों के लिए एक गहरा आघात है.
धर्मेंद्र की सेहत पिछले महीने से ही चर्चा का केंद्र बनी हुई थी. नवंबर की शुरुआत में सांस लेने में तकलीफ के कारण उन्हें मुंबई के प्रसिद्ध ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वहां कुछ दिनों की निगरानी के बाद, 12 नवंबर को उन्हें घर भेज दिया गया, और परिवार ने आश्वासन दिया कि वे धीरे-धीरे ठीक हो रहे हैं. पत्नी हेमा मालिनी और बेटी ईशा देओल ने सोशल मीडिया पर अफवाहों का जमकर खंडन किया था, जिसमें उनकी मृत्यु की झूठी खबरें फैलाई जा रही थीं. हेमा जी ने एक भावुक पोस्ट में लिखा था, "यह असहनीय है! कैसे जिम्मेदार मीडिया ऐसी झूठी खबरें फैला सकता है? वे इलाज पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं." लेकिन आज सुबह उनके घर के बाहर एम्बुलेंस की उपस्थिति ने सबको सदमे में डाल दिया.
अब, मुंबई के विले पार्ले स्थित पवन हंस श्मशान घाट पर उनके पार्थिव शरीर को अंतिम सम्मान दिया जा रहा है. इस शोक की घड़ी में सबसे पहले पहुंचीं हेमा मालिनी, जिनकी आंखें नम थीं और चेहरा दर्द से भरा हुआ. उनके साथ बेटी ईशा देओल भी नजर आईं, जो पिता के अंतिम दर्शन के लिए सिर झुकाए खड़ी थीं. पुत्र सनी देओल अंतिम संस्कार के दायित्वों को निभा रहे हैं, जबकि बॉबी देओल और आहना देओल भी परिवार के साथ खड़े हैं. सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच श्मशान घाट पर सितारों का तांता बंध गया है. अमिताभ बच्चन, जो 'शोले' में उनके साथी रहे, अपने बेटे अभिषेक बच्चन के साथ पहुंचे और चुपचाप श्रद्धांजलि अर्पित की. आमिर खान, सलमान खान, संजय दत्त, करण जौहर, काजोल, अजय देवगन, करीना कपूर, माधुर भंडारकर जैसे दिग्गज कलाकार भी नम आंखों से उन्हें विदाई दे रहे हैं. अमिताभ जी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "एक युग समाप्त हो गया... मेरे भाई, तुम्हारी मुस्कान हमेशा याद रहेगी."
धर्मेंद्र का सफर भारतीय फिल्म इतिहास का एक जीवंत पन्ना है. 1960 में 'दिल भी तेरा हम भी तेरे' से करियर की शुरुआत करने वाले इस सितारे ने छह दशक से ज्यादा समय तक 'फूल और पत्थर', 'मेरा गांव मेरा देश', 'यादों की बारात', 'शोले', 'धर्म वीर', 'सीता और गीता' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया. उनकी देसी अपील, एक्शन, रोमांस और कॉमेडी का अनोखा संगम उन्हें अनमोल बनाता था. 2012 में पद्म भूषण से नवाजे गए धर्मेंद्र ने अपनी अंतिम फिल्म 'इक्कीस' में श्रीराम राघवन के निर्देशन में अपनी दमदार आवाज दी, जो अब उनकी स्वर-कृति के रूप में अमर हो जाएगी. इससे पहले 'तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया' में कृति सेनन और शाहिद कपूर के साथ उनकी मौजूदगी ने फिल्म को यादगार बना दिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा, "भारतीय सिनेमा के एक युग का अंत हो गया. धर्मेंद्र जी की विरासत हमेशा प्रेरणा बनेगी." सोशल मीडिया पर #RIPDharmendra ट्रेंड कर रहा है, जहां फैंस उनकी क्लासिक सीन शेयर कर रहे हैं. उनके जाने से सिनेमा जगत में एक अपूरणीय शून्य पैदा हो गया है, लेकिन उनकी कहानियां – साहस, प्यार और संघर्ष की – पीढ़ियों तक जीवित रहेंगी.