Allahabad High Court on UP Panchayat Election: तीन महीने में चुनाव कराने का आदेश, प्रशासकों की नियुक्ति को मिली हरी झंडी

Rahul Jadaun 14 Oct 2026 05:45 PM 1 Mins
Allahabad High Court on UP Panchayat Election: तीन महीने में चुनाव कराने का आदेश, प्रशासकों की नियुक्ति को मिली हरी झंडी

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि आगामी तीन महीने के भीतर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनावों की पूरी प्रक्रिया संपन्न कराई जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में नियुक्त करने वाले सरकारी शासनादेश को वैध ठहराते हुए, इसके खिलाफ दाखिल सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

तीन घंटे की सुनवाई के बाद आया फैसला

जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने करीब तीन घंटे तक चली विस्तृत बहस के बाद यह आदेश जारी किया। ग्राम पंचायतों का पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार ने निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया था, जिसे कोर्ट में चुनौती दी गई थी। पीठ ने शासनादेश की वैधता को बरकरार रखते हुए साफ किया कि ये प्रशासक अगले तीन महीने (यानी चुनाव संपन्न होने तक) अपने पद पर कार्य करते रहेंगे।

ओबीसी आरक्षण पर स्थिति साफ

अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि राज्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग का कामकाज अप्रभावित रहेगा। हालांकि, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आयोग की अंतिम रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहेगी। मतदान मौजूदा कानूनी ढांचे और नियमों के तहत ही कराया जाएगा, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

क्या था पूरा विवाद?

पंचायत चुनाव समय पर न कराए जाने और प्रशासकों की तैनाती को लेकर अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन ने हाईकोर्ट का रुख किया था:

  • याचिकाकर्ता की दलील: संविधान के अनुच्छेद 243E के तहत किसी भी पंचायत का कार्यकाल पहली बैठक से केवल 5 वर्ष तक ही हो सकता है, जिसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। लिहाजा, पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने से पहले तय समयसीमा में चुनाव पूरा कराना संवैधानिक बाध्यता है।

  • राज्य निर्वाचन आयोग का पक्ष: आयोग ने अदालत में बताया कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 की धारा 12-BB के अनुसार, चुनाव तिथियों की अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार का अधिकार क्षेत्र है, जो आयोग के परामर्श से किया जाता है।

दोनों पक्षों के तर्कों का संज्ञान लेने के बाद अदालत ने संवैधानिक अनिवार्यताओं और प्रशासनिक निरंतरता के बीच संतुलन बनाते हुए राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन माह के भीतर पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न करने की अंतिम रूपरेखा तैयार करने का निर्देश दिया।

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