तेहरान: ईरान में 23 साल की अकाउंटिंग छात्रा नजमेह अमीनी को सोशल मीडिया पोस्ट के लिए मौत की सजा सुनाई गई है. उन पर पैगंबर मुहम्मद का अपमान (सब उल-नबी) करने का आरोप है. जनवरी में देशभर में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों ने उन्हें हिरासत में लिया था.
फरवरी में साइबर पुलिस ने उनकी ऑनलाइन गतिविधियों की जांच के बाद दोबारा गिरफ्तार कर लिया. परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, उन्हें पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई. एक अलग मामले में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने और सरकार विरोधी प्रचार फैलाने के आरोप में 12 साल, 6 महीने और 1 दिन की जेल की सजा भी हुई है.
कोर्ट में क्या दलील दी?
जिस सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से सजा मिली, उसका सटीक कंटेंट सार्वजनिक नहीं किया गया. ईरानी इस्लामिक पीनल कोड के आर्टिकल 262 के तहत पैगंबर या सम्मानित शिया व्यक्ति का अपमान करने पर मौत की सजा हो सकती है. अमीनी ने कोर्ट में कहा कि उन्होंने दोस्तों के साथ साइकेडेलिक मशरूम लेने के बाद हालूसिनेशन की हालत में बात कही थी. बचाव पक्ष ने इसे ‘जुबान फिसलना’ बताया, लेकिन जज ने दलील खारिज कर दी.
जज ने सवाल किया कि अगर वहम वाली हालत में थीं, तो उन्होंने अमेरिका, इजरायल या सरकार के विरोधियों की बेइज्जती क्यों नहीं की. मौत की सजा अभी अंतिम नहीं है. फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है. पिछले महीने जारी ऑडियो में अमीनी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों से मदद की अपील की थी.
उन्होंने कहा कि मैं हीरो नहीं बनना चाहती. मैं बस अपनी आवाज बनना चाहती हूं. मैं एक मासूम लड़की हूं जिसके सपने हैं. मेरे माता-पिता मेरा इंतजार कर रहे हैं. मानवाधिकार समूहों के अनुसार, इस साल ईरान में 600 से ज्यादा लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है. वे चेतावनी दे रहे हैं कि सोशल मीडिया पोस्ट के लिए युवा महिला को मौत की सजा बोलने की आजादी पर सख्ती का खतरनाक संकेत है.