नई दिल्ली: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर लाल किले की प्राचीर एक अभूतपूर्व ऐतिहासिक क्षण की गवाह बनी। स्वतंत्रता दिवस के मुख्य औपचारिक समारोह के दौरान लाल किले पर पहली बार राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का विधिवत और औपचारिक गायन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तिरंगा फहराने के बाद अपने संबोधन में इस गौरवशाली पल को रेखांकित करते हुए कहा कि आज लाल किले की प्राचीर से पहली बार औपचारिक रूप से वंदे मातरम् गूंजा है, जो हर भारतवासी के लिए गर्व का विषय है।
अब तक राष्ट्रीय स्तर के स्वतंत्रता दिवस समारोहों में ध्वजारोहण के साथ केवल राष्ट्रगान 'जन गण मन' की औपचारिक धुन और गायन की परंपरा रही थी। इस वर्ष राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इसे आधिकारिक रूप से मुख्य कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया। प्रधानमंत्री के संबोधन से ठीक पहले और बाद में 'वंदे मातरम्' के गायन ने पूरे माहौल को असीम राष्ट्रभक्ति के रस में सराबोर कर दिया।
समारोह के दौरान देश की युवा शक्ति की ऊर्जा और उनके सपनों को केंद्र में रखा गया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि युवा पीढ़ी ही 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को साकार करने वाली मुख्य ताकत है। लाल किले के सामने ज्ञानपथ पर मौजूद एनसीसी कैडेट्स और 'माय भारत' के हजारों युवाओं ने अपनी उपस्थिति और ऊर्जा से यह संदेश दिया कि आने वाले समय में देश का भविष्य सुरक्षित और सशक्त हाथों में है।
समारोह के दौरान स्वदेशी 105mm लाइट फील्ड गन से 21 तोपों की सलामी दी गई। इसके साथ ही वायुसेना के हेलिकॉप्टरों ने समारोह स्थल पर पुष्प वर्षा की, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज के साथ-साथ इस बार 'वंदे मातरम्' के प्रतीक ध्वज को भी आसमान में लहराया गया।