नई दिल्ली: भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान और इस्लामी सहयोग संगठन (OIC) को एक साथ करारा जवाब दिया है. भारत ने इस्लामाबाद पर जम्मू-कश्मीर में हकीकत से पूरी तरह कटे हुए प्रोपेगैंडा फैलाने का आरोप लगाया और व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान संघ राज्य क्षेत्र में हो रहे विकास पर संदेह करता है, तो उसे ला ला लैंड में रहना चाहिए.
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 55वें सत्र के उच्च-स्तरीय खंड में बोलते हुए, भारत की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान और OIC द्वारा कश्मीर मुद्दा उठाए जाने के बाद भारत के "राइट ऑफ रिप्लाई" का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि भारत को अपना राइट ऑफ रिप्लाई इस्तेमाल करने के लिए मजबूर होना पड़ा है. हम इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हैं.
उन्होंने OIC पर पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा को दोहराने और खुद को उस देश की राजनीतिक मजबूरियों का इको चैंबर बनने देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का नैरेटिव "ईर्ष्या से भरा हुआ" है और एकमात्र अनसुलझा मुद्दा पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्र पर अवैध कब्जा है. "हम पाकिस्तान से आह्वान करते हैं कि वह अपने जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों को खाली करे."
उन्होंने क्षेत्र में भारत की विकास पहल को रेखांकित करते हुए चुनावी भागीदारी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को सामान्य स्थिति के सबूत के रूप में पेश किया. उन्होंने कहा कि "जम्मू-कश्मीर में आम और विधानसभा चुनावों में रिकॉर्ड मतदान यह साबित करता है कि इसके लोग पाकिस्तान द्वारा फैलाई गई आतंकवाद और हिंसा की विचारधारा को पूरी तरह नकार चुके हैं."
इसके बाद उन्होंने इस आदान-प्रदान में सबसे तीखा व्यंग्य किया और कहा, "अगर पिछले साल जम्मू-कश्मीर में उद्घाटित चिनाब रेल ब्रिज, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज है, को नकली माना जा रहा है, तो पाकिस्तान को 'ला ला लैंड' में रहना चाहिए." उन्होंने आगे कहा कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट IMF से मांगी गई उसकी बेलआउट पैकेज से दोगुना से भी अधिक है."