बर्लिन/लखनऊ: जर्मनी में चल रही रुचिकर एआई इंपैक्ट समिट के बीच उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने निवेश कूटनीति की नई कार्यशैली अपनाते हुए अपनी पूर्व निर्धारित यूनाइटेड किंगडम यात्रा स्थगित कर दी. समिट की व्यस्तताओं और वैश्विक प्रतिनिधियों से लगातार संवाद के कारण उन्होंने जर्मनी से ही यूके के निवेशकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वन-टू-वन बातचीत की. इस वर्चुअल संवाद में निवेशकों ने उत्तर प्रदेश में निवेश को लेकर सकारात्मक सहमति जताई, जिसे प्रदेश के लिए अहम उपलब्धि माना जा रहा है.
जर्मनी प्रवास के दौरान उप मुख्यमंत्री को विशेष रूप से सर्विस सेक्टर में अच्छी संभावनाएं दिखीं. ड्रोन तकनीक, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और स्मार्ट सिटी जैसे भविष्य उन्मुख क्षेत्रों में अग्रणी जर्मन कंपनियों के साथ उनकी विस्तृत बैठकें हुईं. कंपनियों ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीतियों, बेहतर कनेक्टिविटी और बड़े बाजार को निवेश के लिए अनुकूल बताया.
हालांकि हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के साथ सेवा क्षेत्र में सबसे अधिक रुचि देखने को मिली. आईटी सेवाएं, स्किल डेवलपमेंट, हेल्थकेयर सपोर्ट और लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट से जुड़ी कंपनियों ने प्रदेश के विशाल उपभोक्ता आधार और कौशल संसाधन को निवेश का मजबूत आधार माना.
इसी क्रम में यूके के निवेशकों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में प्रदेश के औद्योगिक रोडमैप, सिंगल विंडो सिस्टम और त्वरित स्वीकृति प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी साझा की गई. बातचीत सकारात्मक रही और निवेश को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी.
इस बीच जर्मनी में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर तकनीक के क्षेत्र में भी प्रगति हुई और करीब 200 करोड़ रुपये के निवेश पर सहमति बनी, जिससे प्रदेश में उन्नत रेलवे तकनीक सहयोग को गति मिलने की उम्मीद है.
उप मुख्यमंत्री ने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि उत्तर प्रदेश उच्च तकनीक आधारित विनिर्माण के साथ सेवा क्षेत्र को समान प्राथमिकता देते हुए उद्योगों के लिए पारदर्शी और उद्योग-मित्र वातावरण सुनिश्चित कर रहा है. उन्होंने कहा कि निवेशकों को भूमि आवंटन से लेकर संचालन तक हर स्तर पर प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा.
इन क्षेत्रों पर भी हुई चर्चा
सेवा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को भी नई गति मिलेगी
जर्मनी में प्रत्यक्ष बैठकों के साथ यूके के निवेशकों से डिजिटल माध्यम से हुआ संवाद निवेश कूटनीति के बेहद सकारात्मक स्वरूप का संकेत है. इससे न केवल तकनीकी सहयोग के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि सेवा क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को भी नई गति मिलेगी.
संभावित निवेश से कौशल आधारित रोजगार सृजित होंगे और स्मार्ट सिटी व डिजिटल सेवाओं के विस्तार के जरिए शहरी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. जर्मनी में जारी बैठकों और यूके निवेशकों के साथ बनी सहमति को इसी दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है.