नई दिल्ली: उपग्रह की तस्वीर में एक विशाल बादलों की पट्टी दिखाई दी है, जो भारत से चीन तक करीब 4000 किलोमीटर तक फैली हुई है. यह नजारा मानसून के वापसी चरण में भी सक्रिय मौसम प्रणाली को दर्शाता है. नवीनतम सैटेलाइट इमेजरी में उत्तरी और मध्य भारत से हिमालय क्षेत्र होते हुए चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया तक घने बादलों की निरंतर बेल्ट दिख रही है.
पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत पर विशेष रूप से घना बादल छाया हुआ है, जो बांग्लादेश और हिमालय की तलहटी तक फैला है. इस बादल पट्टी में कई चमकीले धब्बे दिख रहे हैं, जो तीव्र संवहनी गतिविधि (कन्वेक्टिव सेल्स) के संकेत हैं. इन क्षेत्रों में भारी बारिश और आंधी-तूफान की संभावना रहती है.
कैसे बनती है ऐसी विशाल पट्टी?
इस तरह की बड़ी बादल बेल्ट आमतौर पर तब बनती है जब नमी से भरी हवा बड़े क्षेत्र में एकत्र होती है. मानसून सर्कुलेशन, लो-प्रेशर सिस्टम या संबंधित वायुमंडलीय गड़बड़ियों का प्रभाव इसमें शामिल होता है. सैटेलाइट तस्वीरें इन प्रणालियों की सीमाओं के पार गति और संगठन को ट्रैक करने का महत्वपूर्ण तरीका हैं. भारत के लिए यह बादल कवर तब दिखाई दिया है जब दक्षिण-पश्चिम मानसून अपनी वापसी के चरण में है.
बंगाल की खाड़ी पर मौसम प्रणालियां पूर्वी और मध्य भारत में बारिश को प्रभावित करती रहती हैं. तस्वीर में बांग्लादेश, म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों तक बादलों की गतिविधि भी साफ दिख रही है, जो क्षेत्रीय वायुमंडलीय परिसंचरण की आपसी जुड़ाव को रेखांकित करती है.
बादल पट्टी की सटीक लंबाई तस्वीर अकेले से तय नहीं की जा सकती. 4000 किलोमीटर का आंकड़ा अनुमानित दृश्य अनुमान है. यह छवि मानसून के सक्रिय वातावरण का एक आकर्षक स्नैपशॉट पेश करती है, भले ही भारत पोस्ट-मानसून सीजन की ओर बढ़ रहा हो.