नई दिल्ली: चायल विकास खंड के कठरा गांव में वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट के लिए चल रही खुदाई के दौरान एक मिट्टी का घड़ा मिला, जो मुगलकालीन सिक्कों से भरा हुआ था. जैसे ही घड़ा बाहर निकाला गया, सैकड़ों सिक्कों को देखकर मजदूरों में खलबली मच गई. गांव में सोने-चांदी के सिक्कों के मिलने की अफवाह तेजी से फैली, जिससे सैकड़ों लोग मौके पर जमा हो गए. जब सिक्कों को साफ करके देखा गया, तो वे तांबे जैसे दिखाई दिए.
कुछ सिक्कों पर उर्दू में लेख था, जबकि कुछ पर हिंदी में "सुल्तान अद आलम" लिखा हुआ था. कुछ ग्रामीण चुपके से कई सिक्के ले गए, जबकि बाकी सिक्कों का गट्ठर मजदूरों ने अपने पास रख लिया. मुगलकालीन सिक्कों का इस तरह मिलना कोई नई बात नहीं है. इससे पहले पश्चिम शरीरा में एक निर्माण कार्य के दौरान भी ऐसे सिक्के मिले थे, जिन्हें पुलिस ने कब्जे में लेकर पुरातत्व विभाग को सौंप दिया था.
इसी तरह का एक वाकया कठरा गांव के प्राथमिक विद्यालय में हुआ, जहां वाटर हार्वेस्टिंग के लिए जेसीबी से खुदाई के दौरान सिक्कों से भरा एक मिट्टी का बर्तन मिला. यह देखकर मजदूर दंग रह गए. सोने-चांदी के सिक्कों की खबर सुनकर गांव वालों की भीड़ उमड़ पड़ी. स्कूल के शिक्षकों ने सिक्कों को धोकर देखा, तो वे तांबे जैसे लगे. ज्यादातर सिक्कों पर उर्दू में लेख था, जबकि कुछ पर हिंदी में "सुल्तान अद आलम" अंकित था.
चायल के खंड विकास अधिकारी दिनेश चंद्र ने बताया कि ग्राम सचिव धर्मेंद्र पांडेय ने उन्हें खुदाई में सिक्के मिलने की जानकारी दी थी, जिसके बारे में तहसील प्रशासन को सूचित कर दिया गया है. हालांकि, तहसील प्रशासन ने क्या कदम उठाए, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है. चरवा थाना प्रभारी महेश सिंह ने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई सूचना नहीं मिली है, न ही स्थानीय बरियावां चौकी से कोई जानकारी प्राप्त हुई है.