नई दिल्ली : लखनऊ की एनआईए स्पेशल कोर्ट ने आतंकी संगठन आईएसआईएस (ISIS) से जुड़े मामले में आरोपी राकिब इमाम अंसारी को दोषी करार देते हुए 5 साल के कठोर कारावास और छह रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है. राकिब ने अदालत में अपना जुर्म स्वीकार कर लिया था, जिसके आधार पर कोर्ट ने उसे दोषी मानते हुए सजा सुनाई.
यह मामला अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से जुड़े संदिग्ध संपर्कों के कारण भी चर्चा में है. एटीएस की जांच में सामने आया कि आईएसआईएस के सक्रिय सदस्य शाहनवाज और रिजवान अली के संपर्क अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ युवकों तक थे. इसी जांच के दौरान राकिब इमाम अंसारी का नाम भी सामने आया, जिसके बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की गई.
एटीएस ने 3 नवंबर 2023 को लखनऊ स्थित एटीएस थाने में एफआईआर दर्ज की थी. जांच की शुरुआत मुंबई के काला चौकी थाने में दर्ज एक मामले से हुई थी, जिसमें फरार आरोपियों शाहनवाज और रिजवान अली की तलाश की जा रही थी. जांच एजेंसियों के अनुसार दोनों आईएसआईएस के सक्रिय सदस्य थे और युवाओं को संगठन से जोड़ने की कोशिश कर रहे थे.
अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि आरोपी आतंकी संगठन की विचारधारा का प्रचार-प्रसार कर रहे थे. उनका उद्देश्य नए लोगों की भर्ती करना, जिहादी गतिविधियों के लिए प्रेरित करना, भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए उकसाना और देश में शरिया कानून लागू करने की साजिश को आगे बढ़ाना था. जांच में यह भी सामने आया कि हथियार जुटाने के प्रयास किए जा रहे थे और इस गतिविधि में राकिब की सक्रिय भूमिका थी.
हालांकि, जांच एजेंसियों ने इस मामले में जिन व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की, वह विशिष्ट आरोपियों और उनके कथित नेटवर्क से संबंधित है. उपलब्ध जानकारी के आधार पर पूरे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी या उसके छात्र समुदाय को इस मामले से जोड़ना उचित नहीं है.